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CAQM की उच्चस्तरीय टीम ने 31 अक्टूबर 2026 को संगरूर, पटियाला और मलेरकोटला में पराली प्रबंधन की समीक्षा की, इन-सीटू और एक्स-सीटू सुविधाओं का दौरा किया और अधिकारियों से सख़्त निगरानी रखने को कहा।
धान की पराली का प्रबंधन समाचार में क्यों है?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की उच्चस्तरीय टीम ने 31 अक्टूबर 2026 को पंजाब के संगरूर, पटियाला और मलेरकोटला ज़िलों में धान की पराली के प्रबंधन की समीक्षा की। समीक्षा में ज़िलों की तैयारी और मौजूदा कटाई मौसम में पराली जलाने से रोकने के उपायों की जाँच की गई।
CAQM राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के लिए सांविधिक निकाय है। टीम में तकनीकी सदस्य डॉ. एस. डी. अत्री और वैज्ञानिक श्री विजय कुमार शामिल थे।
इस मुद्दे की पृष्ठभूमि क्या है?
पराली जलाना धान की कटाई के बाद बचे फ़सल अवशेष को खुले में जलाना है। प्रबंधन या तो इन-सीटू होता है, यानी खेत पर मशीनों से, या एक्स-सीटू, यानी अवशेष को खेत से हटाकर औद्योगिक उपयोग में लाना।
| मद | विवरण |
|---|---|
| बैठक | संगरूर ज़िला परिसर, 31 अक्टूबर 2026 |
| समीक्षित ज़िले | संगरूर, पटियाला, मलेरकोटला |
| इन-सीटू उदाहरण | अहमदगढ़ गाँव में सुपर सीडर |
| एक्स-सीटू इकाई | धान की पराली से चलने वाला बॉयलर, मलेरकोटला |
| बॉयलर क्षमता | 20 TPH |
| नियोजित पराली उपयोग | लगभग 17,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष |
| पेलेट इकाई | नदामपुर गाँव, भवानीगढ़ |
पराली से बने पेलेट बाद में ताप विद्युत संयंत्रों में ईंधन के रूप में उपयोग होते हैं। CPCB की फ़्लाइंग स्क्वॉड और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी समीक्षा में शामिल हुए।
पराली प्रबंधन क्यों महत्वपूर्ण है?
- वायु गुणवत्ता: कम आग का अर्थ है राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की ओर कम धुआँ।
- कृषि अर्थव्यवस्था: मशीनें और पराली का बाज़ार किसानों को जलाने का विकल्प देते हैं।
- ऊर्जा और उद्योग: पेलेट और बॉयलर ईंधन अपशिष्ट को संसाधन में बदलते हैं।
- संघीय सहयोग: कई राज्यों को कवर करने वाला आयोग ज़िला स्तर की कार्रवाई की जाँच करता है।
समीक्षा दिखाती है कि इन-सीटू और एक्स-सीटू विधियाँ साथ मिलकर काम करने के लिए हैं। मशीनें खेत पर अवशेष संभालती हैं, जबकि उद्योग हटाई गई पराली की माँग पैदा करता है।
समीक्षा ने किन चुनौतियों की ओर संकेत किया?
- किसानों ने टीम को फ़सल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी के उपयोग में आने वाली कठिनाइयाँ बताईं।
- ज़मीनी कार्रवाई ज़िला कार्य योजनाओं में किए गए लक्ष्यों के अनुरूप होनी चाहिए।
- जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सख़्त निगरानी और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
- एक्स-सीटू इकाइयों को पराली एकत्र करने और भंडारण के लिए स्थिर आपूर्ति शृंखला चाहिए।
आयोग ने अधिकारियों से कहा कि वे कड़ी निगरानी रखें, सुनिश्चित करें कि धान की पराली का प्रबंधन उनकी योजनाओं के अनुसार हो, और ज़मीनी कार्रवाई को अपने लक्ष्यों के अनुरूप रखें।
आगे की राह क्या है?
- ज़िला-दर-ज़िला योजना
- किसानों को CRM मशीनें उपलब्ध कराना
- एक्स-सीटू माँग बनाना
- आग की निगरानी करीबी से करना
- समीक्षा और सुधार
मशीनों तक आसान पहुँच, किसानों की कठिनाइयों के त्वरित समाधान, उद्योग द्वारा पराली की स्थिर खरीद और दृश्यमान प्रवर्तन मिलकर जलाने को कम करते हैं। आयोग की समीक्षाएँ ज़िला प्रशासनों को जवाबदेह बनाए रखती हैं।
स्थायी समाधान के लिए विश्वास भी आवश्यक है। किसान तब जलाना बंद करेंगे जब मशीनें समय पर उपलब्ध हों, अतिरिक्त लागत उचित रूप से साझा हो और हटाई गई पराली के लिए खरीदार हो। इसलिए अधिकारियों, किसानों और उद्योग को एक शृंखला की तरह काम करना होगा, और आयोग के क्षेत्र दौरे यह परखने का तरीका हैं कि जलाने के चरम मौसम से पहले इस शृंखला की हर कड़ी वास्तव में काम करती है या नहीं।
विद्यार्थियों के लिए मुख्य बिंदु यह है कि प्रतिक्रिया निवारक और दंडात्मक दोनों है: मशीनों और बाज़ारों के माध्यम से तैयारी पहले आती है, और सख़्त निगरानी तथा उल्लंघनों पर कार्रवाई उसका समर्थन करती है।
उत्तर प्रदेश से क्या संबंध है?
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आने वाले उत्तर प्रदेश के ज़िले उसी आयोग के अधीन हैं, इसलिए CAQM का ज़िला कार्य योजनाओं और फ़्लाइंग स्क्वॉड जाँच का तरीका वहाँ भी लागू होता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश सिंधु-गंगा के मैदान का हिस्सा है जहाँ फ़सल अवशेष जलाना भी मायने रखता है। विज्ञप्ति स्वयं केवल पंजाब को कवर करती है, इसलिए उत्तर प्रदेश के आँकड़ों और ज़िलों के नामों की आधिकारिक स्रोतों से प्रतीक्षा है।
अधिक के लिए UP करंट अफेयर्स देखें।
कौन-से तथ्य मुख्य परीक्षा के उत्तर में मूल्य जोड़ते हैं?
- CAQM की उच्चस्तरीय टीम ने 31 अक्टूबर 2026 को संगरूर, पटियाला और मलेरकोटला की समीक्षा की, जो एक सांविधिक आयोग द्वारा ज़िला-स्तरीय पर्यवेक्षण दर्शाता है।
- इन-सीटू उदाहरण: अहमदगढ़ गाँव में सुपर सीडर; एक्स-सीटू उदाहरण: मलेरकोटला में 20 TPH का धान की पराली से चलने वाला बॉयलर, जिसमें लगभग 17,000 मीट्रिक टन पराली प्रति वर्ष खपत की अपेक्षा है।
- नदामपुर, भवानीगढ़ की पेलेट इकाई ऐसे पेलेट बनाती है जो बाद में ताप विद्युत संयंत्रों में ईंधन के रूप में उपयोग होते हैं।
इन उदाहरणों का उपयोग यह दिखाने के लिए करें कि मशीनें और पराली के बाज़ार साथ मिलकर काम करते हैं। उत्तर प्रदेश के संबंध को केवल संदर्भ के रूप में जोड़ें।
मुख्य शब्द
- CAQM
- NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management)।
- इन-सीटू प्रबंधन
- फ़सल अवशेष को खेत पर ही संभालना।
- एक्स-सीटू प्रबंधन
- औद्योगिक उपयोग के लिए अवशेष को खेत से हटाना।
- सुपर सीडर
- अवशेष के बीच से अगली फ़सल बोने वाली मशीन।
- बायोमास पेलेट
- फ़सल अवशेष से बने ईंधन पेलेट।
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-III, GS-VI
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन में क्या अंतर है?
इन-सीटू खेत में मशीनों से अवशेष संभालता है; एक्स-सीटू उसे औद्योगिक उपयोग के लिए हटा ले जाता है।
स्रोत: PIB: CAQM टीम ने पंजाब में पराली प्रबंधन की समीक्षा की
अंतिम सत्यापन: 2026-11-02