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आईआईपीए की देशव्यापी पहुँच और शासन में समावेशी क्षमता निर्माण

By Dr. Shubham Bansal · 2 Nov 2026, 6:46 am IST 1 min read Share
आईआईपीए की देशव्यापी पहुँच और शासन में समावेशी क्षमता निर्माण

ताज़ा ख़बर

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 31 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) को राष्ट्रीय राजधानी से बाहर ले जाना शासन में समावेशी क्षमता निर्माण की प्रमुख प्राथमिकता है। वे आईआईपीए की 72वीं वार्षिक आम सभा को संबोधित कर रहे थे, जिसमें संस्थान के अध्यक्ष उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि: आईआईपीए क्या है?

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान लोक प्रशासन के प्रशिक्षण और अनुसंधान का निकाय है। विज्ञप्ति के अनुसार इसकी स्थापना 1954 में हुई। डॉ. जितेंद्र सिंह इसकी कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष हैं और भारत के उपराष्ट्रपति इसके अध्यक्ष हैं।

मंत्री ने संस्थान की भूमिका को सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत और राष्ट्र निर्माण में सिविल सेवाओं की भूमिका से जोड़ा। उन्होंने इसके कार्य को विकसित भारत के दृष्टिकोण से भी जोड़ा, जिसमें सीखना, अनुसंधान और व्यावसायिक विकास लोक प्रशासन को मजबूत करने के साधन हैं।

विज्ञप्ति के मुख्य आँकड़े

आईआईपीए एक नज़र में
संकेतक आँकड़ा
सदस्यता 11,611
क्षेत्रीय शाखाएँ (31 मार्च 2026) 26
स्थानीय शाखाएँ (31 मार्च 2026) 43
पूर्ण हुई शोध परियोजनाएँ (2025-26) 45
चल रहे अध्ययन 13
प्रशिक्षण कार्यक्रम और संबंधित गतिविधियाँ 130

130 प्रशिक्षण कार्यक्रमों और संबंधित शैक्षणिक गतिविधियों में से 35 राज्य, जिला और स्थानीय स्तर पर कार्यरत राज्य सरकार के अधिकारियों के लिए थे।

मंत्री ने क्या घोषणा की?

  • दिल्ली से आगे पहुँच: भौगोलिक पहुँच बढ़ने से शिक्षण संसाधन, शैक्षणिक गतिविधियाँ और व्यावसायिक नेटवर्क बड़े समुदाय तक पहुँचेंगे।
  • मजबूत शाखाएँ: क्षेत्रीय और स्थानीय शाखाएँ व्यापक भागीदारी, व्यावसायिक जुड़ाव और ज्ञान के प्रसार के माध्यम बनें।
  • डिजिटल शिक्षा: ऑनलाइन पाठ्यक्रम और डिजिटल लर्निंग ज्ञान और प्रशिक्षण तक पहुँच बढ़ाएँगे।
  • निजी क्षेत्र: बड़े दर्शकों तक शिक्षण संसाधन पहुँचाने के लिए निजी क्षेत्र के साथ सहयोग की संभावनाएँ तलाशी जाएँगी।
  • युवा सदस्यता: सदस्यता ढाँचा युवा पेशेवरों और हाल के स्नातकों के लिए खुला है।
  1. क्षेत्रीय और स्थानीय शाखाओं को मजबूत करें
  2. डिजिटल और ऑनलाइन पाठ्यक्रम जोड़ें
  3. निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी करें
  4. व्यापक और अधिक समावेशी भागीदारी

मुद्दे और चुनौतियाँ

  • दिल्ली में केंद्रित: प्रशिक्षण के अवसर राजधानी के अधिकारियों तक सीमित रह सकते हैं।
  • शाखाओं में गुणवत्ता: बड़े नेटवर्क के लिए एकसमान मानक और प्रशिक्षित संकाय चाहिए।
  • डिजिटल विभाजन: ऑनलाइन पाठ्यक्रम केवल उन्हीं की मदद करते हैं जिनके पास उपकरण और कनेक्टिविटी है।
  • निजी साझेदारी: सहयोग में सुरक्षा उपाय चाहिए ताकि लोक सेवा के मूल्य बने रहें।

इरादा और वर्तमान आँकड़े सार्वजनिक हैं; नई शाखाओं के बजट और लक्ष्य आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा में हैं।

हितधारकों का दृष्टिकोण:

कौन शामिल है और उन्हें क्या लाभ है
हितधारक हित
केंद्र सरकार प्रशिक्षित अधिकारियों से बेहतर शासन
राज्य सरकार के अधिकारी राज्य, जिला और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण तक पहुँच
युवा पेशेवर सदस्यता और सीखने के अवसर
शोधकर्ता लोक प्रशासन के मुद्दों का अध्ययन

आगे की राह

  • 26 क्षेत्रीय और 43 स्थानीय शाखाओं को मुख्य वितरण माध्यम के रूप में मजबूत करें।
  • ऑनलाइन पाठ्यक्रम बढ़ाएँ ताकि दिल्ली के बाहर के अधिकारी कम लागत पर सीख सकें।
  • शिक्षण संसाधनों के लिए निजी क्षेत्र के सहयोग की संभावनाएँ तलाशें।
  • अनुसंधान और प्रशिक्षण को विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप रखें।

उत्तर प्रदेश आयाम

विज्ञप्ति राज्य, जिला और स्थानीय स्तर पर राज्य सरकार के अधिकारियों के प्रशिक्षण पर जोर देती है, और आईआईपीए के 35 कार्यक्रम उन्हीं के लिए थे। उत्तर प्रदेश के शासन पर जीएस-V और जीएस-VI के उत्तरों के लिए यह दिखाता है कि केंद्रीय संस्थान राज्य के सिविल सेवकों की कैसे सहायता करते हैं। आधिकारिक पाठ में उत्तर प्रदेश की किसी शाखा या कार्यक्रम का नाम नहीं है, इसलिए राज्य-विशिष्ट आँकड़े आधिकारिक स्रोतों की प्रतीक्षा में हैं। अभ्यर्थियों को यह कमी स्पष्ट रूप से लिखनी चाहिए।

मुख्य परीक्षा के लिए मूल्यवर्धन बिंदु

  • आईआईपीए की स्थापना 1954 में हुई और अब इसकी 26 क्षेत्रीय तथा 43 स्थानीय शाखाएँ हैं (पीआईबी, 31 अक्टूबर 2026)।
  • 2025-26 में इसने 45 शोध परियोजनाएँ पूरी कीं और 130 प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा संबंधित गतिविधियाँ चलाईं।
  • सदस्यता 11,611 तक पहुँच गई है, और युवा पेशेवरों तथा हाल के स्नातकों को जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

क्षमता निर्माण और सुशासन पर निबंध में इन बिंदुओं का उपयोग राजधानी से बाहर संस्थागत पहुँच दिखाने के लिए करें।

मुख्य शब्द

आईआईपीए
भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, प्रशिक्षण और अनुसंधान निकाय।
क्षमता निर्माण
प्रशिक्षण जो अधिकारियों और संस्थाओं का कौशल बढ़ाता है।
क्षेत्रीय शाखा
आईआईपीए की इकाई जो गतिविधियों को दिल्ली से बाहर ले जाती है।
विकसित भारत
विकसित भारत का राष्ट्रीय दृष्टिकोण।
वार्षिक आम सभा
वार्षिक बैठक जो संस्थान के कार्य और प्राथमिकताओं की समीक्षा करती है।

यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-II

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईपीए की कितनी शाखाएँ हैं?

31 मार्च 2026 तक इसकी 26 क्षेत्रीय और 43 स्थानीय शाखाएँ थीं।

आईआईपीए की वर्तमान सदस्यता कितनी है?

सदस्यता 11,611 तक पहुँच गई है।

स्रोत: पीआईबी, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय: आईआईपीए विज्ञप्ति

अंतिम सत्यापन: 2026-11-01

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Dr. Shubham Bansal

Dr. Shubham Bansal is a content specialist at UpRankers, contributing to educational resources designed for candidates preparing for the Uttar Pradesh Public Service Commission (UPPSC) examinations. His work focuses on simplifying complex topics, organizing exam-relevant information, and presenting it in a clear, structured, and accessible format. His content areas include Uttar Pradesh General Knowledge, Indian Polity, History, Geography, Indian Economy, General Science, and current affairs relevant to Uttar Pradesh and India. He aims to help aspirants strengthen their conceptual understanding, revise important topics efficiently, and connect current developments with their broader subject context. At UpRankers, Shubham contributes to the development and refinement of learning resources aligned with the needs of UPPSC aspirants, with an emphasis on clarity, factual accuracy, reliable sourcing, and exam-oriented presentation. Areas of Focus: UPPSC General Studies; Uttar Pradesh GK and state-specific current affairs; Indian History, Polity, Geography, and Economy; National and international current affairs; Exam-oriented educational content and revision resources. Editorial Standards: Content published under his name should be fact-checked against reliable sources and reviewed for accuracy, relevance, and clarity.

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