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गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 19वीं बैठक 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में हुई। 'पुनः भरण' मोबाइल ऐप का शुभारंभ हुआ और बोर्ड ने गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के संशोधित कार्यादेश पर चर्चा की।
गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड क्या है?
गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड केंद्र और गंगा बेसिन राज्यों का उच्चस्तरीय मंच है, जिसका गठन 18 अप्रैल 1972 को बेसिन में बाढ़, कटाव और जल निकासी की समस्याओं पर समन्वित योजना बनाने के लिए किया गया। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री करते हैं।
इसमें संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधि और बेसिन राज्यों के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल होते हैं। गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के अध्यक्ष सदस्य सचिव होते हैं।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| गठन | 18 अप्रैल 1972 |
| अध्यक्ष | केंद्रीय जल शक्ति मंत्री |
| सदस्य सचिव | अध्यक्ष, गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग |
| सदस्य | केंद्रीय मंत्रालय, बेसिन राज्य |
| नवीनतम बैठक | 19वीं, 27 अक्टूबर 2026 |
| स्थान | भारत मंडपम, नई दिल्ली |
19वीं बैठक में क्या निर्णय या चर्चा हुई?
बैठक में चल रही पहलों की समीक्षा हुई, अंतरराज्यीय समन्वय मजबूत किया गया और बाढ़ प्रबंधन के नए दृष्टिकोणों पर विचार हुआ। पत्र सूचना कार्यालय ने इसकी जानकारी 29 अक्टूबर 2026 को दी।
- केंद्रीय मंत्री द्वारा 'पुनः भरण' मोबाइल ऐप का शुभारंभ।
- गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के संशोधित कार्यादेश और पुनर्गठन पर चर्चा।
- जोखिम-आधारित बेसिन मास्टर प्लान पर ध्यान।
- पुलों के नीचे जलमार्गों की पर्याप्तता का आकलन।
- विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की बेहतर गुणवत्ता और बाढ़ परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन।
- बाढ़ प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का उपयोग।
पुनः भरण ऐप को राष्ट्रीय जल मिशन के सहयोग से भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान ने विकसित किया है। यह भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण के उपयुक्त स्थलों की वैज्ञानिक पहचान में मदद करता है।
संशोधित कार्यादेश में बेसिन स्तर पर बाढ़ प्रबंधन की योजना, बाढ़ प्रबंधन योजनाओं का मूल्यांकन, नदी की आकृति और अवसादन संबंधी अध्ययन तथा बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली शामिल हैं। अधिकारियों को समन्वय, तकनीकी मूल्यांकन और तेज़ निर्णयों में सुधार की उम्मीद है।
बोर्ड केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय कैसे करता है?
बोर्ड नीति के लिए मिलन-बिंदु का काम करता है। राज्य अपनी बाढ़ समस्याएँ रखते हैं, केंद्र तकनीकी और वित्तीय दृष्टिकोण देता है, और आयोग तकनीकी मूल्यांकन उपलब्ध कराता है। प्रेस विज्ञप्ति इसे गंगा बेसिन में प्रभावी बाढ़ प्रबंधन के लिए सहयोग और समन्वय का उच्चस्तरीय संस्थागत मंच कहती है।
- राज्य बाढ़ और कटाव के मुद्दे रखते हैं
- आयोग योजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन करता है
- बोर्ड समीक्षा कर दिशा तय करता है
- राज्य समय पर कार्य करते हैं
यह श्रृंखला बताती है कि बैठक में परियोजना रिपोर्ट की गुणवत्ता और समय पर क्रियान्वयन पर ज़ोर क्यों था। कमजोर रिपोर्ट मूल्यांकन में देरी करती है और देर से मिली मंजूरी निर्माण में देरी करती है। विद्यार्थियों को बोर्ड को समन्वय निकाय के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए, क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में नहीं।
बैठक में नदी के व्यवहार को समझने पर भी बल दिया गया। आकृति और अवसादन के अध्ययन से अभियंता यह आँक पाते हैं कि नदी कहाँ खिसक सकती है और पुल या तटबंध कहाँ विफल हो सकता है।
बेसिन स्तर पर बाढ़ प्रबंधन क्यों महत्वपूर्ण है?
नदी बेसिन राज्यों की सीमाएँ पार करता है, इसलिए कोई अकेला राज्य अपनी बाढ़ का प्रबंधन नहीं कर सकता। एक राज्य में बने तटबंध, जल निकासी और पुल दूसरे राज्य में प्रवाह और बाढ़ जोखिम बदल सकते हैं।
| मुद्दा | यह क्यों मायने रखता है |
|---|---|
| नदी की आकृति में बदलाव | धाराएँ बदलती हैं और कटाव का जोखिम बढ़ता है |
| जल निकासी में अवरोध | बाढ़ की अवधि बढ़ती है |
| पुलों के नीचे जलमार्ग | संकरे पाट प्रवाह रोकते हैं |
| वैधानिक मंजूरियाँ | परियोजना शुरू होने में देरी |
| परियोजना रिपोर्ट की गुणवत्ता | कमजोर योजनाएँ कार्य धीमा करती हैं |
बैठक में क्रियान्वयन की बाधाओं के समय पर समाधान पर बल दिया गया, जिसमें आधुनिक सर्वेक्षण तकनीक, सुदृढ़ तकनीकी जांच और वैधानिक मंजूरियाँ शामिल हैं।
आगे की राह क्या है?
- जोखिम-आधारित बेसिन मास्टर प्लान
- आधुनिक सर्वेक्षण और तकनीकी जांच
- मंजूरियाँ और सुदृढ़ परियोजना रिपोर्ट
- राज्यों द्वारा समय पर क्रियान्वयन
- सूचना प्रणाली के माध्यम से निगरानी
- बेसिन मास्टर प्लान केवल पिछले बजट पर नहीं, बाढ़ जोखिम पर आधारित बनाएँ।
- केंद्र, राज्यों और एजेंसियों के बीच समन्वित दृष्टिकोण अपनाएँ।
- बाढ़ नियंत्रण कार्यों के तकनीकी मानकों में सुधार करें।
- योजना के लिए रिमोट सेंसिंग और भू-सूचना का उपयोग करें।
- बाढ़ प्रबंधन को भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण से जोड़ें।
उत्तर प्रदेश से संबंध क्या है?
उत्तर प्रदेश गंगा बेसिन का राज्य है और उसके जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह 19वीं बैठक में उपस्थित थे। बेसिन मास्टर प्लान, पुलों के जलमार्ग और आयोग के कार्यादेश पर लिए गए निर्णय राज्य में गंगा के किनारे बाढ़ और कटाव कार्यों की योजना को प्रभावित करते हैं।
जीएस-VI के उत्तरों के लिए बोर्ड को राज्य के आपदा प्रबंधन और सिंचाई विभागों तथा राज्य एजेंसियों के माध्यम से चलाई जाने वाली केंद्रीय योजनाओं से जोड़ें।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में इसका उपयोग कैसे करें
- सहकारी संघवाद: केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में बेसिन राज्यों के मुख्यमंत्रियों वाला वैधानिक जैसा मंच।
- प्रौद्योगिकी: भू-सूचना आधारित पुनः भरण ऐप और बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली।
- योजना: राहत से जोखिम-आधारित बेसिन योजना की ओर बदलाव।
- मूल्यवर्धन: बोर्ड का गठन 18 अप्रैल 1972 को हुआ; 19वीं बैठक 27 अक्टूबर 2026 को।
संतुलन बिंदु: आधिकारिक पाठ इरादों और प्राथमिकताओं को दर्ज करता है; परिणाम संबंधित राज्यों और एजेंसियों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
मुख्य शब्द
- गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड
- गंगा बेसिन में बाढ़ योजना के लिए केंद्र-राज्य मंच
- गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग
- तकनीकी निकाय, जिसके अध्यक्ष बोर्ड के सदस्य सचिव हैं
- पुनः भरण ऐप
- कृत्रिम भूजल पुनर्भरण के स्थल खोजने वाला ऐप
- बेसिन मास्टर प्लान
- नदी-बेसिन स्तर पर बाढ़ जोखिम प्रबंधन की योजना
- नदी की आकृति
- नदी के आकार और मार्ग में बदलाव
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-II, GS-VI
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड का गठन कब हुआ?
भारत सरकार ने इसका गठन 18 अप्रैल 1972 को किया।
बोर्ड की अध्यक्षता कौन करता है?
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री इसकी अध्यक्षता करते हैं।
स्रोत: पीआईबी: गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 19वीं बैठक
अंतिम सत्यापन: 2026-10-30