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एनसीडीसी की महापरिषद की 93वीं बैठक: सहकारी वित्त और रोडमैप

By Dr. Shubham Bansal · 2 Nov 2026, 6:45 am IST 1 min read Share
एनसीडीसी की महापरिषद की 93वीं बैठक: सहकारी वित्त और रोडमैप

ताज़ा ख़बर

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) की महापरिषद की 93वीं बैठक 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में हुई। सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से एनसीडीसी ने ₹4.14 लाख करोड़ से अधिक का वितरण किया है और 25 वर्षीय रोडमैप माँगा गया।

एनसीडीसी क्या है और क्या निर्णय हुआ?

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) सहकारी संस्थाओं का राष्ट्रीय वित्तपोषण निकाय है। इसकी महापरिषद की 93वीं बैठक 29 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई। उन्होंने निगम के लिए व्यापक 25 वर्षीय रोडमैप तैयार करने को कहा।

विज्ञप्ति में बताए गए आँकड़े
मद आँकड़ा
मंत्रालय के गठन से अब तक वितरण ₹4.14 लाख करोड़ से अधिक
2025-26 में वितरण ₹1.27 लाख करोड़ से अधिक
शुद्ध लाभ, 2025-26 ₹1,475 करोड़
ऋण वसूली दर 99.84 प्रतिशत
शुद्ध एनपीए शून्य
उपस्थिति सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश

मंत्री ने सहकारिता की अवधारणा पर क्या कहा?

मंत्री ने कहा कि भारत की प्रगति को केवल जीडीपी, प्रति व्यक्ति आय या औद्योगिक निवेश से नहीं आँका जा सकता। वास्तविक विकास का अर्थ यह भी है कि समाज के हर वर्ग को अवसर मिले और हर नागरिक सम्मान के साथ जीकर राष्ट्रीय विकास में योगदान दे सके।

उन्होंने कहा कि अलग सहकारिता मंत्रालय ने इस क्षेत्र की दशकों पुरानी माँग पूरी की। इसका उद्देश्य केवल सहकारी संस्थाओं की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि हर नागरिक को विकास की प्रक्रिया से जोड़ना है। उन्होंने इसे 'सहकार से समृद्धि' के विज़न से जोड़ा।

उन्होंने पिछले पाँच वर्षों में एनसीडीसी की प्रगति की सराहना की और इसे एक प्रकार से स्वर्णिम काल कहा। उन्होंने प्रति कर्मचारी लाभ में वृद्धि, ऋण स्वीकृति और संवितरण के विस्तार तथा शून्य बने रहे शुद्ध एनपीए का उल्लेख किया।

बैठक में सहकारी क्षेत्र में वित्तपोषण के विस्तार, नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के विकास, ग्रामीण आजीविका के सुदृढ़ीकरण और निगम की भावी कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि सीमित पूँजी वाले छोटे किसानों, पशुपालकों, ग्रामीण महिलाओं, मछुआरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सामूहिक शक्ति ही सहकारी मॉडल का वास्तविक आधार है।

सहकारी संस्थाओं के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?

  • अलग सहकारिता मंत्रालय केवल समितियों की संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि हर नागरिक को विकास से जोड़ने के लिए बनाया गया।
  • लद्दाख जैसे दूरस्थ स्थानों और पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपस्थिति पहुँच को व्यापक बनाती है।
  • अब लाभ छोटे किसानों, पशुपालकों, मछुआरों, ग्रामीण महिलाओं और कमजोर वर्गों तक पहुँचना चाहिए।
  • प्रशासन पेशेवर होना चाहिए जबकि दृष्टिकोण सहकारी बना रहे।

मंत्री ने सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी विकास का वर्णन किया: पहला हर नागरिक तक पहुँचता है और दूसरा लद्दाख से लक्षद्वीप तक समान भागीदारी सुनिश्चित करता है।

कौन-से नए निर्देश दिए गए?

निर्देश
क्षेत्र निर्देश विवरण
रोडमैप 25 वर्षीय योजना; ढाँचे और पूँजी में बदलाव
पूर्वोत्तर 2030 तक पूर्वोत्तर की आत्मनिर्भरता परियोजनाएँ
वित्त कंसोर्टियम, नाबार्ड और बैंकों के साथ सह-वित्तपोषण
चीनी मिलें चक्रीय अर्थव्यवस्था: एथेनॉल, सीएनजी, मूल्यवर्धित उत्पाद
लोग बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से युवा पेशेवरों को जोड़ना

विज्ञप्ति में छोटे उत्पादकों के लिए पहुँच को लाभ में बदलने की आवश्यकता बताई गई है। पूँजी जुटाने के साधनों का ब्योरा नहीं दिया गया है, इसलिए वह प्रतीक्षित है।

आगे की राह क्या है?

  1. 25 वर्षीय रोडमैप तैयार करें
  2. ढाँचे और पूँजी जुटाने में सुधार करें
  3. बैंकों के साथ कंसोर्टियम बनाएँ
  4. क्षेत्र की परियोजनाओं का समर्थन करें
  5. परिणामों की समीक्षा करें
  • ऋण विस्तार के साथ शुद्ध एनपीए को कम रखें।
  • नाबार्ड, राज्य सहकारी बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों के साथ सह-वित्तपोषण करें।
  • प्रशिक्षित युवा पेशेवरों के साथ नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाएँ विकसित करें।
  • सहकारी चीनी मिलों को एथेनॉल, सीएनजी और उप-उत्पादों की ओर ले जाएँ।

उत्तर प्रदेश से संबंध क्या है?

एनसीडीसी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपस्थित है, इसलिए उत्तर प्रदेश की डेयरी, चीनी और ऋण सहकारी संस्थाएँ इसका वित्त पा सकती हैं। सहकारी चीनी मिलों को एथेनॉल, सीएनजी और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों पर आधारित चक्रीय अर्थव्यवस्था बनाने का निर्देश उत्तर प्रदेश जैसे गन्ना उत्पादक राज्यों के लिए प्रासंगिक है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर में इसका उपयोग कैसे करें

  • विकास मॉडल के रूप में सहकारिता: हर नागरिक को शामिल करने के लिए सहकारिता मंत्रालय बनाया गया।
  • वित्तीय स्वास्थ्य: 2025-26 में शुद्ध एनपीए शून्य और वसूली दर 99.84 प्रतिशत।
  • आजीविका: छोटे किसान, मछुआरे, पशुपालक और ग्रामीण महिलाएँ।
  • सततता: चीनी मिलों में चक्रीय अर्थव्यवस्था।

संतुलन बिंदु: ये आँकड़े बैठक में सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं। लाभार्थियों पर परिणामों को निगम के अपने वित्तीय स्वास्थ्य से अलग प्रश्न मानना चाहिए।

मुख्य शब्द

एनसीडीसी
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, सहकारी संस्थाओं का वित्तदाता
सहकार से समृद्धि
सहकारिता के माध्यम से समृद्धि, घोषित विज़न
शुद्ध एनपीए
ऋण-हानि के प्रावधान के बाद खराब ऋण; 2025-26 में एनसीडीसी के लिए शून्य
सह-वित्तपोषण
ऋणदाताओं द्वारा किसी परियोजना का वित्तपोषण साझा करना
चक्रीय अर्थव्यवस्था
उप-उत्पादों को निवेश के रूप में उपयोग करना, जैसे चीनी मिलों से एथेनॉल

यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-II, GS-III, GS-V

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंत्री ने एनसीडीसी से क्या तैयार करने को कहा?

अगले 25 वर्षों के लिए व्यापक रोडमैप, जिसमें संस्थागत ढाँचा, पूँजी जुटाना और कार्यप्रणाली में बदलाव शामिल हैं।

स्रोत: पीआईबी: एनसीडीसी की महापरिषद की 93वीं बैठक

अंतिम सत्यापन: 2026-10-30

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Dr. Shubham Bansal

Dr. Shubham Bansal is a content specialist at UpRankers, contributing to educational resources designed for candidates preparing for the Uttar Pradesh Public Service Commission (UPPSC) examinations. His work focuses on simplifying complex topics, organizing exam-relevant information, and presenting it in a clear, structured, and accessible format. His content areas include Uttar Pradesh General Knowledge, Indian Polity, History, Geography, Indian Economy, General Science, and current affairs relevant to Uttar Pradesh and India. He aims to help aspirants strengthen their conceptual understanding, revise important topics efficiently, and connect current developments with their broader subject context. At UpRankers, Shubham contributes to the development and refinement of learning resources aligned with the needs of UPPSC aspirants, with an emphasis on clarity, factual accuracy, reliable sourcing, and exam-oriented presentation. Areas of Focus: UPPSC General Studies; Uttar Pradesh GK and state-specific current affairs; Indian History, Polity, Geography, and Economy; National and international current affairs; Exam-oriented educational content and revision resources. Editorial Standards: Content published under his name should be fact-checked against reliable sources and reviewed for accuracy, relevance, and clarity.

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