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31 अक्टूबर 2026 के पीआईबी बैकग्राउंडर के अनुसार भारत का सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में 19 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 68.4 प्रतिशत हो गया, जिससे एक बिलियन से अधिक लोग इस ढांचे में आए। ईपीएफओ की सदस्यता, पेंशन सहायता और दावा निपटान बढ़े हैं, और अनिवार्य वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई है।
पृष्ठभूमि: सामाजिक सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण है
सामाजिक सुरक्षा जीवन के विभिन्न चरणों में आय की हानि और अन्य आकस्मिकताओं से श्रमिकों और परिवारों की रक्षा करती है। यह सेवानिवृत्ति में वित्तीय सुरक्षा भी मजबूत करती है। अनौपचारिक, गिग और प्लेटफ़ॉर्म आधारित कार्य के बढ़ने से आय और रोजगार की निरंतरता में अंतर बढ़ता है, इसलिए ऐसी सुरक्षा की आवश्यकता बढ़ जाती है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है। यह पात्र श्रमिकों के लिए भविष्य निधि, पेंशन और बीमा योजनाएँ चलाता है। 2026 की नई योजनाएँ सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत लाई गई हैं।
| नई योजना (2026) | किसे बदला | क्या मिलता है |
|---|---|---|
| ईपीएफ योजना | पूर्ववर्ती ईपीएफ योजना | सेवानिवृत्ति बचत, आंशिक निकासी |
| ईपीएस | कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 | मासिक पेंशन, आश्रितों को पेंशन |
| ईडीएलआई | ईडीएलआई योजना, 1976 | 7 लाख रुपये तक का बीमा |
मुख्य आँकड़े:
| संकेतक | पहले | नवीनतम |
|---|---|---|
| सामाजिक सुरक्षा कवरेज | 19 प्रतिशत (2015) | 68.4 प्रतिशत (2026) |
| योगदान देने वाले सदस्य | 3.49 करोड़ (2014-15) | लगभग 7.98 करोड़ |
| पेंशन पाने वाले | 51.04 लाख (2014-15) | लगभग 82 लाख |
| निपटाए गए दावे | 1.30 करोड़ (2014-15) | पिछले एक वर्ष में 6.42 करोड़ |
| योगदान देने वाले प्रतिष्ठान | उल्लेख नहीं | 7.68 लाख |
सदस्य संख्या 16 सितंबर 2026 तक की है, और प्रतिष्ठानों तथा पेंशनभोगियों के आँकड़े सितंबर 2026 तक के हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
- व्यापक कवरेज: 68.4 प्रतिशत कवरेज बताता है कि 2015 के बाद संरक्षित श्रमिकों का आधार तेजी से बढ़ा है।
- वेतन सीमा: सीमा को 25,000 रुपये करने से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों के अनिवार्य कवरेज में आने की उम्मीद है।
- अनौपचारिक श्रमिक: ई-श्रम, पीएम-एसवाईएम और प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना असंगठित श्रमिकों और कमजोर समूहों की सहायता करती हैं।
- उपयोग में सरलता: सरल निकासी और ऑटो-सेटलमेंट से सदस्यों की कागजी कार्रवाई कम होती है।
निकासी और अनुपालन में सुधार
- आंशिक निकासी नियम: 13 प्रावधानों को तीन श्रेणियों में समेकित किया गया, अर्थात अनिवार्य आवश्यकताएं, आवास की आवश्यकताएं और विशेष परिस्थितियां।
- अलग सीमाएँ: शिक्षा के लिए 10 और विवाह के लिए 5 निकासी, जबकि पहले दोनों की संयुक्त सीमा 3 थी।
- शेष राशि और सेवा: अक्टूबर 2025 में पेश ढांचा पीएफ शेष का 75 प्रतिशत तक निकालने की अनुमति देता है, न्यूनतम सेवा अवधि 12 महीने है।
- ऑटो-सेटलमेंट: पात्र अग्रिम दावों की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई।
- बैंक सत्यापन: पात्र ऑनलाइन दावों के लिए चेक-लीफ की छवि या अटेस्टेड पासबुक अपलोड करना अब आवश्यक नहीं है।
- अनुपालन योजनाएँ: विश्वास 2026 क्षति या दंड से जुड़े पात्र विवादों का एकमुश्त निपटान कराती है, और एमनेस्टी 2026 प्रतिष्ठानों को अपने पीएफ ट्रस्ट नियमित करने में मदद करती है।
- सदस्य योगदान देता है
- नियोक्ता योगदान देता है
- ईपीएफओ निवेश करता है और ब्याज देता है
- सदस्य निकासी या दावा करता है
- सेवानिवृत्ति या मृत्यु पर पेंशन या बीमा
मुद्दे और चुनौतियाँ
- औपचारिक-अनौपचारिक अंतर: ईपीएफओ औपचारिक रोजगार को कवर करता है, इसलिए गिग और अनौपचारिक श्रमिक अलग योजनाओं पर निर्भर हैं।
- पात्रता नियम: आंशिक निकासी निर्धारित शर्तों के अधीन रहती है।
- अनुपालन का बोझ: चूक पर नियोक्ताओं को क्षति और दंड का सामना करना पड़ता है, जिसे एकमुश्त निपटान योजनाएँ कम करने का प्रयास करती हैं।
- जागरूकता: डिजिटल दावों के लिए श्रमिकों को ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग आना चाहिए।
आगे की राह
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के ढांचे को गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों तक बढ़ाएँ।
- डिजिटल निपटान में सुधार जारी रखें ताकि दावे बिना मैनुअल चरणों के चुकाए जाएँ।
- असंगठित श्रमिकों को योजनाओं से जोड़ने के लिए ई-श्रम डेटा का उपयोग करें।
- निपटान योजनाओं और नियोक्ता पोर्टल के माध्यम से स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करें।
उत्तर प्रदेश आयाम
उत्तर प्रदेश में अनौपचारिक कार्यबल बड़ा है, इसलिए ई-श्रम और पीएम-एसवाईएम जैसी योजनाएँ सामाजिक मुद्दों और शासन पर जीएस-V तथा जीएस-VI के उत्तरों के लिए महत्वपूर्ण हैं। बैकग्राउंडर में राष्ट्रीय आँकड़े हैं, राज्यवार कवरेज या उत्तर प्रदेश की किसी नामित योजना का उल्लेख नहीं है। इसलिए राज्य के कवरेज आँकड़े आधिकारिक राज्य स्रोतों से मिलने तक प्रतीक्षित हैं, और अभ्यर्थियों को बिना स्रोत वाले ज़िला आँकड़े उद्धृत करने से बचना चाहिए।
मुख्य परीक्षा के लिए मूल्यवर्धन बिंदु
- कवरेज 2015 में 19 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 68.4 प्रतिशत हुआ, एक बिलियन से अधिक लोग (पीआईबी बैकग्राउंडर)।
- अनिवार्य वेतन सीमा 15,000 रुपये से 25,000 रुपये हुई, जिससे 51 लाख से अधिक और कर्मचारी दायरे में आएँगे।
- ईडीएलआई 2026 अलग प्रीमियम के बिना 7 लाख रुपये तक का बीमा देती है।
श्रम और कल्याण पर निबंध में इन बिंदुओं का उपयोग कवरेज और वितरण दोनों में सुधार दिखाने के लिए करें।
मुख्य शब्द
- ईपीएफओ
- भविष्य निधि, पेंशन और बीमा योजनाएँ चलाने वाला वैधानिक निकाय।
- वेतन सीमा
- मासिक वेतन की वह सीमा जिसके नीचे ईपीएफओ कवरेज अनिवार्य है।
- ईडीएलआई
- जमा से जुड़ा बीमा, जो सेवा के दौरान मृत्यु पर दिया जाता है।
- ई-श्रम
- असंगठित श्रमिकों के पंजीकरण का पोर्टल।
- ऑटो-सेटलमेंट
- निर्धारित सीमा के भीतर बिना मैनुअल प्रक्रिया के दावे का भुगतान।
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-II, GS-III
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ईपीएफओ के अनिवार्य कवरेज की नई वेतन सीमा क्या है?
यह 25,000 रुपये प्रति माह है, जो पहले 15,000 रुपये थी।
ईडीएलआई 2026 कितना बीमा देती है?
अलग प्रीमियम के बिना 7 लाख रुपये तक।
स्रोत: पीआईबी बैकग्राउंडर: भारत का सामाजिक सुरक्षा कवरेज
अंतिम सत्यापन: 2026-11-01