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केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बुसान में विश्व समुद्री दिवस की गोलमेज बैठक में कहा कि वैश्विक समुद्री नियम ऐसे हों जिन्हें हर देश लागू कर सके, और उन्होंने कोरियाई कंपनियों को भारत के पोत निर्माण क्षेत्र में आमंत्रित किया। पीआईबी ने यह जानकारी 26 अक्टूबर 2026 को दी।
यह खबर में क्यों है?
- 26 अक्टूबर 2026 को पीआईबी ने बताया कि पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया के बुसान में विश्व समुद्री दिवस पर उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक को संबोधित किया।
- उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानक महत्वाकांक्षी और सार्वभौमिक रहें, पर उनमें राष्ट्रीय परिस्थितियों, प्रौद्योगिकी और वित्त के अंतर का ध्यान रखा जाए। इसके लिए उन्होंने साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं के सिद्धांत का उल्लेख किया।
- उन्होंने कोरिया समुद्री उपकरण संघ से भी मुलाकात की, जो 30 अक्टूबर को मुंबई में अपना पहला भारतीय कार्यालय खोलेगा।
मुख्य तथ्य क्या हैं?
| क्या | विवरण |
|---|---|
| 2025 में बने समुद्री कानून | पाँच, मार्च 2026 से लागू |
| समुद्री एकल खिड़की | 69 बंदरगाह और टर्मिनल |
| जहाज रीसाइक्लिंग सुविधाएँ | 115, हांगकांग कन्वेंशन के अनुरूप |
| स्वीकृत पोत निर्माण पैकेज | लगभग 7.8 अरब डॉलर, सितंबर 2025 |
| उत्पादन वृद्धि | 2025 में 40 प्रतिशत; 2026 में 80 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त |
| प्रत्यक्ष सहायता वाले जहाज | 120 से अधिक, मूल्य 1.27 अरब डॉलर से अधिक |
| निर्यात ऑर्डर | उस मूल्य का 80 प्रतिशत से अधिक |
| दस वर्षों की माँग | 400 से अधिक जहाज, लगभग 23 अरब डॉलर |
स्थैतिक संबंध क्या है?
- भारत चाहता है कि देशों के बीच क्रियान्वयन की खाई व्यावहारिक साझेदारियों से पाटी जाए, जैसे अनुभवी और विकासशील देशों को जोड़ने वाले संयुक्त कार्य समूह।
- ऐसी जोड़ी सर्वेक्षकों और निरीक्षकों को प्रशिक्षित कर सकती है, कानून के मसौदे में मदद कर सकती है और समयबद्ध योजनाएँ बना सकती है, ताकि राष्ट्रीय क्षमता टिकाऊ बने।
- भू-राजनीतिक अस्थिरता, समुद्री डकैती और लाल सागर में रुकावट के बीच आईएमओ सम्मेलनों को पोत परिवहन के लिए मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ कहा गया।
- मंत्रालय ने सरकारी संस्थाओं की माँग एकत्र की है, ताकि भारतीय पोत निर्माण कंपनियों को ऑर्डर की स्पष्ट तस्वीर मिले।
उत्तर प्रदेश से जुड़ा पहलू क्या है?
विज्ञप्ति में उत्तर प्रदेश या राज्य के किसी अंतर्देशीय बंदरगाह का उल्लेख नहीं है, इसलिए राज्य का कोई आँकड़ा नहीं दिया गया है। संबंध शासन और लॉजिस्टिक्स के माध्यम से है: उत्तर प्रदेश भू-आबद्ध राज्य है जिसके निर्यातक भारतीय बंदरगाहों और जहाजरानी शृंखला पर निर्भर हैं, और पोत निर्माण नीति व्यापार लागत, आपूर्तिकर्ता उद्योगों में रोज़गार और अंतर्देशीय जलमार्ग संपर्क को प्रभावित करती है। यह जीएस-III अर्थव्यवस्था और जीएस-II अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए उपयोगी है।
याद रखने की युक्ति
Rules, Ready, Ships: सार्वभौमिक नियम (Rules), हर देश के लिए तैयार क्षमता (Ready), और दुनिया के लिए भारत में बने जहाज (Ships)।
संभावित भ्रम
- आईएमओ और कोमिया (KOMEA) एक नहीं हैं: एक संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी है, दूसरा कोरिया का उद्योग संघ।
- सितंबर 2025 में स्वीकृत पोत निर्माण पैकेज और 400 से अधिक जहाजों की ऑर्डर संभावना एक नहीं हैं।
- विश्व समुद्री दिवस अवसर था; बैठक का स्थान बुसान था, कोई भारतीय बंदरगाह नहीं।
मुख्य शब्द
- आईएमओ (IMO)
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी जो वैश्विक जहाजरानी नियम तय करती है।
- साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियाँ
- सिद्धांत कि देश लक्ष्य साझा करते हैं, पर क्षमता और दायित्व में भिन्न होते हैं।
- समुद्री एकल खिड़की
- बंदरगाह और जहाजरानी मंज़ूरियों के लिए एकल डिजिटल इंटरफ़ेस।
- हांगकांग कन्वेंशन
- सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल जहाज रीसाइक्लिंग पर आईएमओ का कन्वेंशन।
- कोमिया (KOMEA)
- कोरिया समुद्री उपकरण संघ, जो 1980 में समुद्री उपकरण निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए बना।
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-II, GS-III
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुसान गोलमेज बैठक में भारत ने क्या माँग की?
भारत ने ऐसे वैश्विक समुद्री नियमों की माँग की जिन्हें हर देश व्यावहारिक रूप से लागू कर सके, और ऐसे सहयोग की जो राष्ट्रीय क्षमता बनाए।
अंतिम सत्यापन: 2026-10-27