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डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग ने 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक आईआईटी दिल्ली में आयोजित ईटीडी-2026 संगोष्ठी में शोध तक पहुँच के लिए बहुभाषी एआई उपकरण प्रदर्शित किए, जिनमें दस्तावेज़ अनुवाद, स्पीच-टू-टेक्स्ट और ओसीआर शामिल हैं।
यह खबर में क्यों है?
- 23 से 25 अक्टूबर 2026 के बीच डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग ने आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक थीसिस और शोध प्रबंध पर 29वें अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (ईटीडी-2026) में भाग लिया।
- सत्र का शीर्षक 'एआई भाषिणी पर कार्यशाला: दूरियों को पाटना और उत्पादकता बढ़ाना' था, जिसमें दिखाया गया कि भाषा-प्रथम डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना शैक्षणिक सामग्री में भाषा बाधाएँ कैसे घटा सकती है।
- एक साथ अनुवाद के साथ भाषण के लिप्यंतरण का लाइव प्रदर्शन किया गया, साथ ही भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के लिए बनाया गया दस्तावेज़ अनुवाद कार्यक्षेत्र दिखाया गया।
मुख्य तथ्य क्या हैं?
| क्या | आँकड़ा या विवरण |
|---|---|
| संचयी एआई अनुमान (inference) | 10 अरब से अधिक |
| टेक्स्ट भाषाएँ | 36 भारतीय भाषाएँ |
| वॉयस भाषाएँ | 23 भारतीय भाषाएँ |
| अंतरराष्ट्रीय भाषाएँ | 35 |
| अनुवाद प्लगइन वाली सरकारी वेबसाइटें | 800 से अधिक |
| सीएजी कार्यक्षेत्र में दस्तावेज़ का आकार | 100 से 500 पृष्ठ |
| आयोजन | ईटीडी-2026, आईआईटी दिल्ली, 23 से 25 अक्टूबर 2026 |
स्थैतिक संबंध क्या है?
- भाषा की बाधाएँ शोध तक पहुँच सीमित करती हैं, इसलिए भाषिणी थीसिस, शोध प्रबंध और रिपोर्ट को भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने में मदद करता है।
- भाषिणी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की सोच पर चलता है, जहाँ खुले साझा प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर सेवाएँ देते हैं।
- वैज्ञानिक और शैक्षणिक सामग्री की विश्वसनीयता के लिए मानवीय समीक्षा के साथ क्षेत्र-विशिष्ट मशीन अनुवाद पर ज़ोर दिया गया।
- ग्रंथिका को पुस्तकों, पांडुलिपियों, लोक कथाओं और मौखिक इतिहास को डिजिटल बनाने के उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
- प्रतिभागियों ने पीडीएफ फ़ाइलों के तुरंत अनुवाद और विशेष शैक्षणिक व वैज्ञानिक सामग्री के लिए एआई अनुवाद की विश्वसनीयता के बारे में पूछा, इसलिए गुणवत्ता जाँच और डेटा सुरक्षा पर चर्चा हुई।
उत्तर प्रदेश से जुड़ा पहलू क्या है?
उत्तर प्रदेश में ई-गवर्नेंस के लिए हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की डिजिटल सेवाएँ महत्वपूर्ण हैं, जहाँ नागरिक फॉर्म, नोटिस और पोर्टल के लिए हिंदी और स्थानीय भाषाओं का उपयोग करते हैं। विज्ञप्ति में उत्तर प्रदेश की किसी परियोजना का उल्लेख नहीं है, इसलिए संबंध शासन के माध्यम से है: वेबसाइट अनुवाद, वॉयस सेवाएँ और दस्तावेज़ अनुवाद जैसे उपकरण राज्य विभागों को नागरिकों तक उनकी अपनी भाषा में पहुँचने में मदद कर सकते हैं। यह जीएस-II शासन और जीएस-III विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़ता है।
याद रखने की युक्ति
भाषिणी = पुल: वॉयस, टेक्स्ट, ओसीआर। भाषा की खाई पर तीन पुल।
संभावित भ्रम
- भाषिणी कोई एक ऐप नहीं है; यह डेटासेट, मॉडल, एपीआई और अनुप्रयोगों का प्लेटफॉर्म है।
- भाषादान नागरिकों से भाषा डेटा जुटाता है, जबकि ग्रंथिका पुस्तकों और पांडुलिपियों को डिजिटल बनाता है।
- ईटीडी-2026 इलेक्ट्रॉनिक थीसिस पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी है, भाषिणी का आयोजन नहीं।
मुख्य शब्द
- भाषिणी
- बहुभाषी एआई सेवाएँ देने वाली राष्ट्रीय भाषा-प्रथम डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना।
- डीपीआई (DPI)
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: सार्वजनिक और निजी उपयोग के लिए खुली साझा डिजिटल प्रणालियाँ।
- ओसीआर (OCR)
- ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन: स्कैन किए दस्तावेज़ों और छवियों से टेक्स्ट निकालना।
- भाषादान
- भारतीय भाषाओं में भाषण और टेक्स्ट डेटा के लिए नागरिक योगदान की पहल।
- शोधगंगा
- इन्फ्लिबनेट द्वारा संचालित थीसिस और शोध प्रबंधों का शोध भंडार।
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-III, GS-II
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाषिणी टेक्स्ट के लिए कितनी भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है?
विज्ञप्ति के अनुसार टेक्स्ट के लिए 36 और वॉयस के लिए 23 भारतीय भाषाएँ।
स्रोत: भाषिणी ने ईटीडी-2026 में सुलभ शोध के लिए बहुभाषी एआई समाधान प्रदर्शित किए (पीआईबी)
अंतिम सत्यापन: 2026-10-27