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आयुष मंत्रालय के मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ने 'पतंजल योगसूत्र: विभूति पाद (व्यास भाष्य के आलोक में)' पर पाँच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू की, जो 26 से 30 अक्टूबर 2026 तक चलेगी।
यह खबर में क्यों है?
- 26 अक्टूबर 2026 को पीआईबी ने बताया कि मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) ने 'पतंजल योगसूत्र: विभूति पाद (व्यास भाष्य के आलोक में)' पर पाँच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया।
- कार्यशाला 26 से 30 अक्टूबर 2026 तक चलेगी और इसका उद्देश्य सूत्रों व उनकी पारंपरिक व्याख्या के व्यवस्थित अध्ययन से विभूति पाद की समझ गहरी करना है।
- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के वैदिक दर्शन विभाग के पूर्व प्रोफेसर प्रो. कृष्ण कांत शर्मा ने विषय विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया।
मुख्य तथ्य क्या हैं?
| क्या | विवरण |
|---|---|
| आयोजन | पतंजल योगसूत्र: विभूति पाद पर राष्ट्रीय कार्यशाला |
| आयोजक | मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान |
| मंत्रालय | आयुष |
| तिथियाँ | 26 से 30 अक्टूबर 2026, पाँच दिन |
| विषय विशेषज्ञ | प्रो. कृष्ण कांत शर्मा, पूर्व में बीएचयू, वाराणसी |
| संस्थान की निदेशक | डॉ. ज्योति केसवानी |
| समन्वयक | डॉ. इंदु शर्मा, सहायक प्रोफेसर, योग शिक्षा |
स्थैतिक संबंध क्या है?
- विभूति पाद योगसूत्र का तीसरा अध्याय है और धारणा, ध्यान और समाधि का वर्णन करता है, जिन्हें मिलाकर संयम कहते हैं।
- यह विभिन्न सिद्धियों, उनके निहितार्थों और आध्यात्मिक प्रगति में विवेक की आवश्यकता को भी समझाता है।
- वक्ताओं ने कहा कि सूत्र मानव मन को समझने और नियंत्रित करने तथा अनुशासन और जागरूकता के लिए मार्गदर्शन देते हैं।
- एमडीएनआईवाई शास्त्रीय योग ग्रंथों के व्यवस्थित अध्ययन और भारत की दार्शनिक विरासत को बढ़ावा दे रहा है।
- कार्यशाला सूत्रों और पारंपरिक टीका के अध्ययन का शैक्षणिक मंच देती है और यह समझने का अवसर कि शास्त्रीय योग शिक्षाएँ चेतना की उच्च अवस्थाओं और योगिक अनुशासन को समझने में कैसे सहायक हैं।
उत्तर प्रदेश से जुड़ा पहलू क्या है?
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय विषय विशेषज्ञ का मूल संस्थान है, और वाराणसी संस्कृत व दार्शनिक अध्ययन का प्रमुख केंद्र है, जो इस विषय को राज्य की संस्कृति और विरासत (जीएस-V) से जोड़ता है। विज्ञप्ति में किसी राज्य कार्यक्रम का वर्णन नहीं है, इसलिए उत्तर प्रदेश का कोई आँकड़ा नहीं जोड़ा गया है। यह विषय जीएस-I भारतीय संस्कृति के नोट्स में भी उपयोगी है।
याद रखने की युक्ति
विभूति = तीसरा अध्याय, तीन चरण: धारणा, ध्यान, समाधि, मिलकर संयम।
संभावित भ्रम
- योगसूत्र और व्यास भाष्य एक नहीं हैं; दूसरा पहले की टीका है।
- विभूति पाद सिद्धियों और संयम से संबंधित है, उन आठ अंगों से नहीं जो किसी अन्य अध्याय में पहले बताए गए हैं।
- एमडीएनआईवाई आयुष मंत्रालय का संस्थान है, विश्वविद्यालय नहीं।
मुख्य शब्द
- योगसूत्र
- पतंजलि से जुड़ा योग पर शास्त्रीय ग्रंथ।
- विभूति पाद
- योगसूत्र का तीसरा अध्याय, जो उन्नत योगाभ्यास और सिद्धियों का वर्णन करता है।
- व्यास भाष्य
- योगसूत्र की पारंपरिक टीका।
- संयम
- धारणा, ध्यान और समाधि का एक साथ अभ्यास।
- सिद्धि
- विभूति पाद में वर्णित योगिक उपलब्धि।
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-I, GS-V
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कार्यशाला का केंद्र क्या है?
यह व्यास भाष्य के आलोक में योगसूत्र के विभूति पाद का अध्ययन करती है।
अंतिम सत्यापन: 2026-10-27