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अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत सृष्टि का जलावतरण

By Dr. Shubham Bansal · 29 Oct 2026, 5:01 am IST 1 min read Share
अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत सृष्टि का जलावतरण

ताज़ा ख़बर

रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारतीय नौसेना के लिए अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत (एनजीओपीवी) यार्ड 1283 'सृष्टि' का जलावतरण 27 October 2026 को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में हुआ, जिसे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया से जोड़ा गया है।

यह खबर में क्यों है?

  • पीआईबी (रक्षा मंत्रालय) ने 27 October 2026 को बताया कि यार्ड 1283 (सृष्टि) का जलावतरण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, गोवा में हुआ।
  • पोत का जलावतरण श्रीमती संदीपा सहाय ने किया, जिस अवसर पर सचिव (रक्षा वित्त) श्री विश्वजीत सहाय उपस्थित थे।
  • विज्ञप्ति इस जलावतरण को नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताती है।

मुख्य तथ्य क्या हैं?

पीआईबी विज्ञप्ति के तथ्य
मद विवरण
पोत यार्ड 1283 (सृष्टि)
प्रकार अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत (एनजीओपीवी)
निर्माता गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल), गोवा
अन्य निर्माता जीआरएसई, कोलकाता, साथ-साथ एनजीओपीवी बना रहा है
डिजाइन और निर्माण स्वदेशी
नाम का अर्थ संस्कृत में रचना
भूमिकाएं निगरानी, खोज एवं बचाव, एचएडीआर, समुद्री डकैती-रोधी

विज्ञप्ति के अनुसार स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित ये पोत मौजूदा अपतटीय गश्ती पोतों और एनजीओपीवी की क्षमताओं को बहु-आयामी कार्यों के लिए बढ़ाएंगे: समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव, अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) और समुद्री डकैती-रोधी अभियान।

भूमिकाओं का क्या अर्थ है?

समुद्री निगरानी का अर्थ है खतरों और अवैध गतिविधियों के लिए समुद्र पर नजर रखना। खोज एवं बचाव का अर्थ है समुद्र में जान बचाना। अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा में समुद्र में तेल-गैस मंच जैसे प्रतिष्ठान आते हैं। एचएडीआर मानवीय सहायता एवं आपदा राहत है, जिसमें नौसेना के जहाज प्रभावित तटों तक मदद पहुंचाते हैं। समुद्री डकैती-रोधी अभियान जहाजों पर हमलों से निपटते हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार ये कार्य बहु-आयामी हैं और नए पोत नौसेना के मौजूदा अपतटीय गश्ती पोतों (ओपीवी) और एनजीओपीवी की क्षमता बढ़ाएंगे। यह भी कहा गया कि कार्यक्रम भारतीय नौसेना की समृद्ध परंपराओं और मूल्यों को दर्शाता है, जिसमें नौसेना, रक्षा मंत्रालय और जीएसएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • समारोह 27 October 2026 को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में हुआ।
  • जीएसएल और जीआरएसई दोनों एनजीओपीवी का निर्माण साथ-साथ कर रहे हैं।
  • इन पोतों के नाम भारत की विरासत से लिए गए हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

एनजीओपीवी श्रेणी का निर्माण एक साथ दो शिपयार्ड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और जीआरएसई, कोलकाता, में हो रहा है। पोतों के नाम भारत की समृद्ध विरासत से लिए गए हैं, और सृष्टि का संस्कृत में अर्थ रचना या निर्माण करने की क्रिया है।

विज्ञप्ति जलावतरण को सरकार के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के विजन से जोड़ती है। परीक्षा के लिए याद रखें कि विज्ञप्ति केवल जलावतरण बताती है; कमीशनिंग या नौसेना को सौंपे जाने का उल्लेख नहीं है।

उत्तर प्रदेश का पहलू क्या है?

विज्ञप्ति में उत्तर प्रदेश का कोई डेटा नहीं है और किसी यूपी संस्थान का नाम नहीं है। एकमात्र संबंध स्वदेशी रक्षा विनिर्माण का राष्ट्रीय विषय है, जो GS-V और GS-VI अर्थव्यवस्था विषयों से जुड़ता है; राज्य स्तर के तथ्य यूपी सरकार के स्रोतों से लेने होंगे।

संभावित भ्रम

  • जलावतरण कमीशनिंग नहीं है।
  • एनजीओपीवी अपतटीय गश्ती पोत की श्रेणी है, विध्वंसक या फ्रिगेट नहीं।
  • यार्ड 1283 निर्माता द्वारा पोत को दिया गया क्रमांक है; सृष्टि उसका नाम है।

मुख्य शब्द

एनजीओपीवी
अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत।
जीएसएल
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, सृष्टि का निर्माता।
जीआरएसई
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता, दूसरा एनजीओपीवी शिपयार्ड।
एचएडीआर
मानवीय सहायता एवं आपदा राहत।

यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-III

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सृष्टि का जलावतरण कहां हुआ?

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, गोवा में, 27 October 2026 को।

सृष्टि का क्या अर्थ है?

विज्ञप्ति के अनुसार संस्कृत में इसका अर्थ रचना है।

स्रोत: पीआईबी: अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत यार्ड 1283 सृष्टि का जलावतरण

अंतिम सत्यापन: 2026-10-29

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Dr. Shubham Bansal

Dr. Shubham Bansal is a content specialist at UpRankers, contributing to educational resources designed for candidates preparing for the Uttar Pradesh Public Service Commission (UPPSC) examinations. His work focuses on simplifying complex topics, organizing exam-relevant information, and presenting it in a clear, structured, and accessible format. His content areas include Uttar Pradesh General Knowledge, Indian Polity, History, Geography, Indian Economy, General Science, and current affairs relevant to Uttar Pradesh and India. He aims to help aspirants strengthen their conceptual understanding, revise important topics efficiently, and connect current developments with their broader subject context. At UpRankers, Shubham contributes to the development and refinement of learning resources aligned with the needs of UPPSC aspirants, with an emphasis on clarity, factual accuracy, reliable sourcing, and exam-oriented presentation. Areas of Focus: UPPSC General Studies; Uttar Pradesh GK and state-specific current affairs; Indian History, Polity, Geography, and Economy; National and international current affairs; Exam-oriented educational content and revision resources. Editorial Standards: Content published under his name should be fact-checked against reliable sources and reviewed for accuracy, relevance, and clarity.

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