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बिहार ग्रामीण बैंक के दो औद्योगिक विवाद 22 और 23 अक्टूबर 2026 को सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय), पटना के सुलह प्रयासों से सुलझे, जिससे 10,900 से अधिक कर्मचारियों को लगभग 77.69 करोड़ रुपये का वित्तीय लाभ होगा।
यह खबरों में क्यों है?
- विवाद 22 और 23 अक्टूबर 2026 को मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय के अंतर्गत सुलह के माध्यम से हल हुए।
- बिहार ग्रामीण बैंक अधिकारी संघ के साथ पहले समझौते से लगभग 8,400 कर्मचारियों को लगभग 67.17 करोड़ रुपये का लाभ होगा।
- बिहार ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन के साथ दूसरे समझौते से लगभग 2,500 कर्मचारियों को लगभग 10.52 करोड़ रुपये का लाभ होगा, जिसमें लगभग 9.02 करोड़ रुपये का आवर्ती वार्षिक लाभ शामिल है।
मुख्य तथ्य एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| मंत्रालय | श्रम एवं रोजगार |
| सुलहकर्ता अधिकारी | सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय), पटना |
| समझौता 2 (23 अक्टूबर 2026) | वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन; लगभग 2,500 कर्मचारी; लगभग 10.52 करोड़ रुपये |
| कुल | 10,900 से अधिक कर्मचारी; लगभग 77.69 करोड़ रुपये |
| आवर्ती वार्षिक लाभ | लगभग 9.02 करोड़ रुपये |
| मुद्दे | पीएलआई भुगतान, भत्ते, वेतन वृद्धि, यात्रा भत्ता, पदोन्नति, अनुकंपा नियुक्तियाँ, मकान किराया भत्ता, ओवरटाइम |
समझौतों में क्या सुलझा?
अधिकारियों के समझौते में प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन का भुगतान, कार्य भत्ते, वेतन वृद्धि, यात्रा भत्ते में वृद्धि, पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्तियाँ शामिल हैं। कर्मचारियों के समझौते में 12वें द्विपक्षीय समझौते का प्रभावी कार्यान्वयन, मकान किराया भत्ते में वृद्धि, दिव्यांग कर्मचारियों के लिए परिवहन भत्ते में वृद्धि, ओवरटाइम का भुगतान, पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता और वार्ता परिषद का गठन शामिल है।
दोनों समझौते रचनात्मक संवाद तथा कर्मचारी संगठनों और बैंक प्रबंधन के सक्रिय सहयोग से हुए, जिससे औद्योगिक संबंधों में सामंजस्य मज़बूत हुआ।
सुलह क्यों महत्वपूर्ण है?
सुलह मुकदमेबाज़ी से तेज़ और सस्ती है, और इससे नियोक्ता-कर्मचारी संबंध बने रहते हैं। दो दिनों में विवाद निपटाकर केंद्रीय तंत्र ने बैंक और उसके कर्मचारियों को लंबी विवाद प्रक्रिया से बचाया और वेतन-संबंधी राहत सीधे पहुँचाई। विज्ञप्ति इसे मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) संगठन की कर्मचारी हितों की रक्षा और निष्पक्ष श्रम उपायों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का संकेत बताती है।
स्थैतिक पाठ्यक्रम से इसका संबंध क्या है?
- औद्योगिक संबंध: सुलह औद्योगिक संबंध कानून के तहत विवाद निपटाने का पहला, गैर-न्यायिक चरण है।
- औद्योगिक संबंध संहिता 2020 लागू की जा रही चार श्रम संहिताओं का हिस्सा है।
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण ऋण संस्थाओं का एक प्रकार हैं, जिनका स्वामित्व केंद्र, राज्य और प्रायोजक बैंक के पास होता है।
उत्तर प्रदेश का पहलू क्या है?
विज्ञप्ति बिहार ग्रामीण बैंक से संबंधित है, उत्तर प्रदेश से नहीं। उत्तर प्रदेश से संबंध केवल इतना है कि वही केंद्रीय सुलह तंत्र और श्रम कानून राज्य में केंद्रीय क्षेत्र के प्रतिष्ठानों पर लागू होते हैं; विज्ञप्ति में यूपी का कोई आँकड़ा नहीं है, इसलिए कोई नहीं दिया गया।
कौन-से जोड़े आसानी से भ्रमित करते हैं?
- सुलह और न्याय-निर्णय एक नहीं हैं: अधिकारी पक्षों को सहमति तक पहुँचाने में मदद करता है, निर्णय नहीं देता।
- बिहार ग्रामीण बैंक उत्तर प्रदेश का बैंक नहीं है।
- दोनों समझौते अलग हैं: एक अधिकारियों के साथ, एक कर्मचारियों के साथ।
मुख्य शब्द
- सुलह
- औद्योगिक विवाद सुलझाने के लिए सहायता-प्राप्त वार्ता।
- औद्योगिक विवाद
- रोजगार की शर्तों पर नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच विवाद।
- मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय)
- विवादों में सुलह कराने वाला केंद्रीय श्रम तंत्र।
- द्विपक्षीय समझौता
- प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच हुआ समझौता।
- प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन
- प्रदर्शन से जुड़ा भुगतान।
- अनुकंपा नियुक्ति
- दिवंगत कर्मचारी के परिजन को दी जाने वाली नौकरी।
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-II, GS-III
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विवादों में सुलह किसने कराई?
मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के अंतर्गत सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय), पटना ने।
कितने कर्मचारियों को लाभ होगा?
10,900 से अधिक कर्मचारियों को।
स्रोत: पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति: बिहार ग्रामीण बैंक में औद्योगिक विवादों का समाधान
अंतिम सत्यापन: 2026-10-28