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उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग का कहना है कि वह भारत को अनुमति-आधारित से विश्वास-आधारित नियमन की ओर ले जा रहा है; 27 अक्टूबर 2026 को बताया गया कि 2,50,046 स्टार्टअप मान्यता प्राप्त हैं, 47,957 अनुपालन आवश्यकताएँ कम हुईं और केंद्रीय कानूनों के 900 प्रावधान अपराध की श्रेणी से बाहर किए गए, तथा 22 भाषाओं में डिजिटल सिंगल-विंडो मंज़ूरियाँ उपलब्ध हैं।
डीपीआईआईटी ने क्या बताया?
उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) अनुमति-आधारित से विश्वास-आधारित नियामकीय ढाँचे की ओर बढ़ रहा है, जिसमें स्टार्टअप तंत्र, अनुपालन में कमी, सेक्टर नियमन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और सिंगल-विंडो मंज़ूरी के सुधार शामिल हैं। 27 अक्टूबर 2026 की पीआईबी विज्ञप्ति कारोबार शुरू करने, रोजगार, निवेश और डिजिटल सेवाओं में प्रगति बताती है।
इन सुधारों का उद्देश्य कारोबार पर नियामकीय बोझ घटाना है। विज्ञप्ति में स्टार्टअप, ऋण गारंटी, नियमन में ढील और मंज़ूरियों के आँकड़े हैं, जिन्हें नीचे सारांशित किया गया है।
मुख्य आँकड़े क्या हैं?
| संकेतक | आँकड़ा |
|---|---|
| मान्यता प्राप्त स्टार्टअप | 2,50,046 |
| स्टार्टअप में बताए गए रोजगार | 25.42 लाख |
| ज़िलों में विस्तार | 770 से अधिक |
| महानगरों के बाहर स्टार्टअप | 52 प्रतिशत |
| कम से कम एक महिला निदेशक वाले स्टार्टअप | 48 प्रतिशत |
| स्वीकृत सीड फंड | 775.67 करोड़ रुपये |
| 532 ऋणों पर ऋण गारंटी | 1,662.71 करोड़ रुपये |
| कम की गई अनुपालन आवश्यकताएँ | 47,957 |
| अपराध की श्रेणी से बाहर प्रावधान | 900 |
| स्टार्टअप के लिए नियामकीय सुधार | 63 |
कम की गई 47,957 आवश्यकताओं में से 22,290 का डिजिटलीकरण हुआ, 16,141 को सरल बनाया गया, 5,255 को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया और 4,271 को समाप्त किया गया। जन विश्वास अधिनियमों से अपराध-मुक्त किए गए 900 प्रावधानों में 2023 में 42 अधिनियमों के 183 प्रावधान और 2026 में 79 अधिनियमों के 717 प्रावधान शामिल हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
- कारोबार में सुगमता: कम अनुपालन और अपराध-मुक्तीकरण से कंपनियों का नियामकीय जोखिम घटता है।
- समावेशन: 52 प्रतिशत स्टार्टअप महानगरों के बाहर हैं और 48 प्रतिशत में कम से कम एक महिला निदेशक है।
- वित्त: प्रति ऋणकर्ता गारंटी सीमा 10 करोड़ रुपये से बढ़कर 20 करोड़ रुपये हुई और 27 चैंपियन सेक्टरों के लिए वार्षिक शुल्क घटकर 1 प्रतिशत हुआ।
- निवेश: विज्ञप्ति के अनुसार 12 वर्षों में 843 बिलियन डॉलर का एफडीआई आया और 17 सेक्टरों में ऑटोमैटिक रूट का विस्तार हुआ।
मुद्दे और चुनौतियाँ क्या हैं?
- राज्यों में असमान क्रियान्वयन: राज्यों ने कारोबार सुधार कार्ययोजना के सात संस्करणों में 9,700 से अधिक सुधार लागू किए, पर ज़िला-स्तरीय सुधार अब तक 222 हैं।
- श्रम संक्रमण: 29 केंद्रीय श्रम कानून चार संहिताओं में समेकित हुए, इसलिए जागरूकता और अनुपालन सहायता की ज़रूरत है।
- सुरक्षा उपायों के साथ विश्वास: अपराध-मुक्तीकरण में गंभीर उल्लंघनों के लिए पर्याप्त निवारण बना रहना चाहिए।
- पहुँच: जेम पर स्टार्टअप पंजीकरण जनवरी 2021 के 7,929 से बढ़कर 43,260 हुए, पर टियर-2 और टियर-3 शहरों से आगे पहुँच के लिए निरंतर प्रयास चाहिए।
| मद | पहले | अब |
|---|---|---|
| छंटनी या बंदी के लिए पूर्व अनुमति | 100 श्रमिक | 300 श्रमिक |
| कारखाना लागू होने की सीमा, बिजली सहित | 10 श्रमिक | 20 श्रमिक |
| कारखाना लागू होने की सीमा, बिजली रहित | 20 श्रमिक | 40 श्रमिक |
| संविदा श्रमिक लाइसेंस | 20 श्रमिक | 50 श्रमिक |
| पेसो लाइसेंस की वैधता | 5 वर्ष | 10 वर्ष |
आगे की राह क्या है?
- जन विश्वास अधिनियमों और आगे के अपराध-मुक्तीकरण के माध्यम से विश्वास-आधारित नियमन की ओर बढ़ना जारी रखें।
- कारोबार सुधार कार्ययोजना को ज़िला स्तर पर गहरा करें, जिसमें कलेक्ट्रेट, विकास प्राधिकरण और शहरी स्थानीय निकाय शामिल हों।
- राष्ट्रीय सिंगल विंडो प्रणाली का विस्तार करें, जो अब 22 भाषाओं में उपलब्ध है, और पेसो जैसे नियामकों का डिजिटल एकीकरण करें।
- निधियों की निधि, सीड फंड और ऋण गारंटी से स्टार्टअप को सहयोग दें और इसे टियर-2 व टियर-3 शहरों तक बढ़ाएँ।
उत्तर प्रदेश का आयाम क्या है?
विज्ञप्ति में उत्तर प्रदेश का कोई आँकड़ा नहीं है। राज्य से संबंध यह है कि कारोबार सुधार कार्ययोजना के माध्यम से राज्य सुधार लागू करते हैं, जो ज़िला कलेक्ट्रेट, विकास प्राधिकरणों और शहरी स्थानीय निकायों तक पहुँचती है। उत्तर प्रदेश की स्टार्टअप नीति और राज्य की सिंगल-विंडो प्रणाली निवेश मित्र इन राष्ट्रीय उपायों के राज्य-स्तरीय समकक्ष हैं और GS-V (अर्थव्यवस्था एवं शासन) के लिए प्रासंगिक हैं। किसी राज्य आँकड़े के लिए यूपी औद्योगिक विकास विभाग का हवाला दें।
उत्तर-तैयार किट
- परिचय: भारत कारोबार नियमन में अनुमति माँगने से विश्वास बनाने की ओर बढ़ रहा है।
- मूल्य-वर्धन 1: 47,957 अनुपालन आवश्यकताएँ कम हुईं और 900 प्रावधान अपराध की श्रेणी से बाहर हुए।
- मूल्य-वर्धन 2: 2,50,046 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप, 52 प्रतिशत महानगरों के बाहर।
- मूल्य-वर्धन 3: 29 केंद्रीय श्रम कानून चार संहिताओं में समेकित हुए।
- निष्कर्ष: विश्वास-आधारित शासन तब सफल होता है जब सरलीकरण के साथ सुरक्षा उपाय और राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन जुड़े हों।
मुख्य शब्द
- विश्वास-आधारित शासन
- ऐसा नियमन जो सद्भाव मानकर पूर्व अनुमतियाँ घटाता है।
- अपराध-मुक्तीकरण
- मामूली, प्रक्रियागत उल्लंघनों पर आपराधिक दंड हटाना।
- जन विश्वास अधिनियम
- केंद्रीय अधिनियमों के प्रावधानों को अपराध-मुक्त करने वाले कानून।
- कारोबार सुधार कार्ययोजना
- राज्य स्तरीय कारोबार सुगमता सुधार कार्यक्रम।
- राष्ट्रीय सिंगल विंडो प्रणाली
- कारोबार मंज़ूरियों का डिजिटल मंच।
- स्टार्टअप के लिए निधियों की निधि
- सिडबी द्वारा संचालित वैकल्पिक निवेश कोषों में प्रतिबद्धता।
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-II, GS-III, GS-V
स्रोत: पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति: डीपीआईआईटी ने विश्वास-आधारित शासन को बढ़ावा दिया
अंतिम सत्यापन: 2026-10-28