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भ्रामक विज्ञापनों और वॉकी-टॉकी की गैर-अनुपालन बिक्री पर सीसीपीए की कार्रवाई

By Dr. Shubham Bansal · 27 Oct 2026, 7:54 am IST 1 min read Share
भ्रामक विज्ञापनों और वॉकी-टॉकी की गैर-अनुपालन बिक्री पर सीसीपीए की कार्रवाई

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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी पर वॉकी-टॉकी के भ्रामक विज्ञापनों के लिए 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिनमें परिचालन आवृत्ति और लाइसेंस आवश्यकताएँ छिपाई गई थीं। 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019' के तहत यह आदेश 25 अक्टूबर 2026 को सामने आया। 16,970 से अधिक गैर-अनुपालन प्रविष्टियाँ मिलने के बाद प्राधिकरण ने 12 संस्थाओं के खिलाफ अंतिम आदेश पारित किए हैं, जिन पर कुल 58 लाख रुपये का जुर्माना है।

सीसीपीए ने क्या कार्रवाई की?

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने 25 अक्टूबर 2026 को बताए गए आदेश में होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी पर वॉकी-टॉकी के भ्रामक विज्ञापनों के लिए 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। सीसीपीए अब तक 12 संस्थाओं के खिलाफ अंतिम आदेश दे चुका है, जिनमें कुल जुर्माना 58 लाख रुपये है।

आदेश 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019' के तहत पारित हुआ। उसमें पाया गया कि प्रविष्टियों में परिचालन आवृत्ति और लाइसेंस आवश्यकताएँ नहीं बताई गई थीं, जिससे खरीदार गुमराह हो सकते थे।

कानूनी पृष्ठभूमि क्या है?

'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019' सीसीपीए को भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार देता है। प्राधिकरण ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ज़रूरी नियामक जानकारी के बिना वॉकी-टॉकी की बड़े पैमाने पर प्रविष्टि और बिक्री का स्वतः संज्ञान लिया।

'लो पावर और वैरी लो पावर शॉर्ट-रेंज रेडियो आवृत्ति उपकरण (लाइसेंस की आवश्यकता से छूट) नियम, 2018' के तहत 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज़ बैंड में काम करने वाले व्यक्तिगत मोबाइल रेडियो को कुछ शर्तों के साथ लाइसेंस से छूट है। इस बैंड के बाहर के अन्य वायरलेस उपकरणों पर संबंधित नियामक नियम लागू रहते हैं।

स्वतः संज्ञान प्रविष्टियों की जाँच प्लेटफॉर्म को नोटिस अंतिम आदेश और जुर्माना न्यायालयों में अपील

मुख्य आँकड़े क्या हैं?

सीसीपीए की विज्ञप्ति में बताए गए आँकड़े
मद आँकड़ा
पाई गई गैर-अनुपालन प्रविष्टियाँ 16,970 से अधिक
नोटिस पाने वाली ई-कॉमर्स कंपनियाँ 13
अंतिम आदेश वाली संस्थाएँ 12
कुल जुर्माना 58 लाख रुपये
पाँच बड़े प्लेटफॉर्म में से प्रत्येक पर जुर्माना 10 लाख रुपये
अन्य सात संस्थाओं में से प्रत्येक पर जुर्माना 1 लाख रुपये
होगर टेक्नोलॉजीज पर जुर्माना 1 लाख रुपये

10-10 लाख रुपये का जुर्माना पाने वाले पाँच प्लेटफॉर्म हैं: अमेज़न सेलर सर्विसेज, फ्लिपकार्ट इंटरनेट, मीशो, मेटा प्लेटफॉर्म्स और ट्रेडइंडिया (इन्फोकॉम नेटवर्क)।

यह मामला क्यों मायने रखता है?

  • यह पुष्टि करता है कि लाइसेंस या मंज़ूरी होने से विज्ञापनदाता खरीद से पहले पूरी और सटीक जानकारी देने की ज़िम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता।
  • यह दिखाता है कि ऑनलाइन भुगतान गेटवे या शॉपिंग कार्ट के बिना वेबसाइट पर भी भ्रामक विज्ञापन हो सकते हैं।
  • यह उपभोक्ताओं को उन उपकरणों की खरीद से कानूनी और आर्थिक नुकसान से बचाता है जिन्हें वे वैध रूप से इस्तेमाल नहीं कर सकते।
  • यह सार्वजनिक सुरक्षा और नियामक पहलुओं वाले उत्पादों तक उपभोक्ता संरक्षण का दायरा बढ़ाता है।

मुद्दे और चुनौतियाँ क्या हैं?

  • कई कंपनियों ने आदेशों को चुनौती दी है: अमेज़न और फ्लिपकार्ट कर्नाटक उच्च न्यायालय गए हैं।
  • मेटा प्लेटफॉर्म्स और ट्रेडइंडिया ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील की, जिसने ट्रेडइंडिया को जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश दिया।
  • इंडियामार्ट दिल्ली उच्च न्यायालय गया है, जबकि मामला अभी प्राधिकरण के पास विचाराधीन है।
  • प्लेटफॉर्म पर बहुत बड़ी संख्या में प्रविष्टियाँ होती हैं, इसलिए बड़े पैमाने पर नियामक जानकारी की जाँच कठिन है।

आगे की राह क्या है?

  • विज्ञापनों और उत्पाद प्रविष्टियों में परिचालन आवृत्ति, लाइसेंस आवश्यकताएँ और अन्य नियामक जानकारी स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए।
  • विक्रेताओं और प्लेटफॉर्म को उन उत्पादों को सूचीबद्ध करने से पहले नियामक अनुपालन जाँचना चाहिए जिनके वैध उपयोग की विशेष शर्तें हैं।
  • सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने की प्रतिबद्धता दोहराई है, खासकर सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े उत्पादों के लिए।
  • पारदर्शिता के लिए अंतिम आदेश सीसीपीए की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

उत्तर प्रदेश से जुड़ा पहलू क्या है?

उत्तर प्रदेश के उपभोक्ता भी अन्य राज्यों की तरह ऐसे उपकरण ऑनलाइन खरीदते हैं, और राज्य में उपभोक्ता निवारण 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019' के तहत राज्य और ज़िला उपभोक्ता आयोगों के माध्यम से चलता है। विज्ञप्ति में उत्तर प्रदेश का आँकड़ा नहीं है, इसलिए कोई आँकड़ा नहीं दिया गया है। राज्य का खरीदार राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन का उपयोग कर सकता है या ज़िला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर सकता है, जबकि सीसीपीए व्यापक उल्लंघनों पर कार्रवाई करता है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर में क्या उपयोग करें?

प्रस्तावना: डिजिटल बाज़ारों में जानकारी उपभोक्ता की पहली सुरक्षा है।

  • कानून: 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019' और भ्रामक विज्ञापनों व अनुचित व्यापार प्रथाओं पर उसके प्रावधान।
  • नियामक: मुख्य आयुक्त और एक आयुक्त के नेतृत्व वाला सीसीपीए, जो स्वतः संज्ञान लेता है।
  • सिद्धांत: नियामक मंज़ूरी से सटीक, पूरी और महत्वपूर्ण जानकारी देने का कर्तव्य समाप्त नहीं होता।

निष्कर्ष: मज़बूत प्रकटीकरण नियम और सक्रिय प्रवर्तन वैध व्यापार को रोके बिना ई-कॉमर्स में भरोसा बनाते हैं।

मुख्य शब्द

सीसीपीए
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण, उपभोक्ता अधिकारों और अनुचित व्यापार प्रथाओं का राष्ट्रीय नियामक।
भ्रामक विज्ञापन
ऐसा विज्ञापन जो गलत या अधूरी जानकारी देता है और उपभोक्ताओं को धोखा दे सकता है।
स्वतः संज्ञान (Suo motu)
किसी प्राधिकरण द्वारा अपनी पहल पर की गई कार्रवाई।
परिचालन आवृत्ति
वह रेडियो आवृत्ति बैंड जिस पर वायरलेस उपकरण काम करता है।
लाइसेंस छूट
तय शर्तों के तहत बिना लाइसेंस उपकरण के उपयोग की अनुमति।

यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-II, GS-III

स्रोत: सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों और वॉकी-टॉकी की गैर-अनुपालन बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज की (पीआईबी)

अंतिम सत्यापन: 2026-10-27

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Dr. Shubham Bansal

Dr. Shubham Bansal is a content specialist at UpRankers, contributing to educational resources designed for candidates preparing for the Uttar Pradesh Public Service Commission (UPPSC) examinations. His work focuses on simplifying complex topics, organizing exam-relevant information, and presenting it in a clear, structured, and accessible format. His content areas include Uttar Pradesh General Knowledge, Indian Polity, History, Geography, Indian Economy, General Science, and current affairs relevant to Uttar Pradesh and India. He aims to help aspirants strengthen their conceptual understanding, revise important topics efficiently, and connect current developments with their broader subject context. At UpRankers, Shubham contributes to the development and refinement of learning resources aligned with the needs of UPPSC aspirants, with an emphasis on clarity, factual accuracy, reliable sourcing, and exam-oriented presentation. Areas of Focus: UPPSC General Studies; Uttar Pradesh GK and state-specific current affairs; Indian History, Polity, Geography, and Economy; National and international current affairs; Exam-oriented educational content and revision resources. Editorial Standards: Content published under his name should be fact-checked against reliable sources and reviewed for accuracy, relevance, and clarity.

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