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दूसरा राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026, 25 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर में 'विकसित भारत 2047' के लिए शहरी शासन, नियोजन, वित्त और सेवा आपूर्ति पर 7 तकनीकी सत्रों के बाद संपन्न हुआ। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने कहा कि सफलता का पैमाना सेवाओं की गुणवत्ता होनी चाहिए। नीति आयोग ने सशक्त नगर सरकारों और सुधारों से जुड़ी फंडिंग का आग्रह किया। ये सम्मेलन की सिफारिशें हैं, अधिसूचित नियम या कानून नहीं, और राज्यों को अपने नगरपालिका कानूनों के माध्यम से इन पर अमल करना होगा।
दूसरे राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन का निष्कर्ष क्या रहा?
दूसरा राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026, 25 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर में 'विकसित भारत 2047' के लिए शहरी शासन, नियोजन और सेवा आपूर्ति पर व्यावहारिक सुझावों के साथ संपन्न हुआ। 7 तकनीकी सत्रों में सुधारों की रूपरेखा रखी गई, और आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने कहा कि सफलता का आकलन परियोजना पूरी होने से नहीं, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता से होना चाहिए।
नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने समापन सत्र में कहा कि शहरों को राज्यों की राजधानियों से नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने सशक्त शहरी स्थानीय निकायों, बेहतर नगर निगम वित्त और राष्ट्रीय शहरी मिशनों के तहत सुधारों से जुड़ी फंडिंग का आह्वान किया। ये सम्मेलन की सिफारिशें हैं। ये अभी अधिसूचित नियम या कानून नहीं हैं।
संवैधानिक और नीतिगत आधार क्या है?
74वाँ संविधान संशोधन शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा और 18 कार्यों की सूची देता है, जिनमें मास्टर प्लानिंग, जलापूर्ति, अग्निशमन सेवाएँ और यातायात शामिल हैं। श्री गौबा ने कहा कि राज्यों को संशोधन के अनुरूप सभी 18 कार्य सौंपने चाहिए।
केंद्रीय मिशन वर्षों से शहरों की मदद करते रहे हैं। आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने 'अमृत', 'स्वच्छ भारत मिशन-शहरी' और 'पीएम स्वनिधि' का उल्लेख किया, जिनसे जल और स्वच्छता सेवाएँ बढ़ीं, अपशिष्ट प्रबंधन सुधरा, शहरी आवागमन मज़बूत हुआ और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला।
- सम्मेलन के सत्र
- सुधार संबंधी सुझाव
- राज्य नए नगरपालिका कानून अपनाएँ
- सुधारों से जुड़ी फंडिंग
- बेहतर शहरी सेवाएँ
कौन-से आँकड़े बताए गए?
| संकेतक | आँकड़ा | टिप्पणी |
|---|---|---|
| भारत की जनसंख्या | लगभग 165 करोड़ | 2060 के आसपास स्थिर होने की संभावना |
| शहरी जनसंख्या | लगभग 50 करोड़ से 85 करोड़ | 2050 के लिए अनुमान |
| अर्बन चैलेंज फंड | 1 लाख करोड़ रुपये | बजट 2025-26 में घोषित |
| सिटी इकोनॉमिक रीजन्स | 7 क्षेत्र, प्रत्येक 5,000 करोड़ रुपये | पाँच वर्षों में, इस वर्ष के बजट में |
| मेट्रो और बस प्रणालियों में निवेश | लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपये | 2014 के बाद से |
| वित्त आयोग अनुदान का हिस्सा | 36% से 45% | शहरी स्थानीय निकायों के अनुदान में हिस्सा |
ये सुधार क्यों मायने रखते हैं?
- शहरों को ऐसे केंद्र बताया गया है जहाँ प्रतिभा, पूँजी और विचार मिलते हैं, इसलिए शहरों की क्षमता विकास तय करती है।
- सशक्त नगर सरकारें स्थानीय ज़रूरतों का जवाब राज्य की राजधानियों से तेज़ी से दे सकती हैं।
- मिश्रित-उपयोग ज़ोनिंग और परिवहन-केंद्रित विकास से भूमि की आपूर्ति बढ़ती है और आवास की लागत घटती है।
- परिणाम-आधारित सेवाएँ परिसंपत्ति निर्माण से ध्यान हटाकर नागरिकों को मिलने वाली गुणवत्ता पर केंद्रित करती हैं।
मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
- नगर निकायों का राजस्व कम बना हुआ है, और संपत्ति कर तथा उपयोगकर्ता शुल्क की वसूली में सुधार की ज़रूरत है।
- वित्त आयोग के अनुदान बढ़ने के बावजूद राज्यों से शहरों को मिलने वाला हस्तांतरण कम है।
- प्रतिबंधात्मक एफएआर (FAR) और भवन नियम भूमि की उपलब्धता सीमित करते हैं और लागत बढ़ाते हैं।
- पैदल यात्रियों और सेवाओं से जुड़ी संस्थागत ज़िम्मेदारियाँ अस्पष्ट हैं और एजेंसियों के बीच समन्वय कमज़ोर है।
- कई कार्य शहरी स्थानीय निकायों को हस्तांतरित नहीं किए गए हैं।
आगे की राह क्या है?
| विषय | सुझाव |
|---|---|
| आदर्श नगरपालिका कानून | महापौर को पाँच वर्ष का कार्यकाल और स्पष्ट कार्यकारी शक्तियाँ |
| आदर्श भवन निर्माण उप-नियम | डिजिटल मंज़ूरी, जोखिम-आधारित जाँच, स्व-प्रमाणन |
| सेवा आपूर्ति | प्रदर्शन-आधारित अनुबंध और नगरपालिका कैडर |
| वित्त | अपने राजस्व स्रोत, साख, भूमि-आधारित वित्तपोषण |
| चलने का अधिकार | वैधानिक योजनाओं में पैदल चलने का अधिकार शामिल करना |
- 'मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव सिटी गवर्नेंस' रिपोर्ट में पाँच वर्ष के कार्यकाल वाले सीधे चुने गए महापौर, मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली और समय पर नगर निकाय चुनाव का सुझाव दिया गया है।
- राज्यों को राज्य वित्त आयोगों का नियमित गठन करना चाहिए और किराये के आवास के लिए मॉडल टेनेंसी एक्ट अपनाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश से जुड़ा पहलू क्या है?
उत्तर प्रदेश में नगर निगम और अन्य शहरी स्थानीय निकाय 74वें संशोधन और राज्य के नगरपालिका कानूनों के तहत काम करते हैं। सम्मेलन ने राज्यों से सभी 18 कार्य सौंपने, समय पर चुनाव कराने और राज्य वित्त आयोगों का नियमित गठन करने का आग्रह किया, इसलिए ये सुझाव उत्तर प्रदेश के शहरी तंत्र पर सीधे लागू होते हैं। यहाँ दिए गए स्रोतों में उत्तर प्रदेश के आँकड़े नहीं हैं, इसलिए कोई आँकड़ा नहीं दिया गया है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में क्या उपयोग करें?
प्रस्तावना: शहरों को राज्यों की राजधानियों से नहीं चलाया जा सकता, इसलिए सशक्त शहरी सरकारें 'विकसित भारत 2047' के लिए केंद्रीय हैं।
- संवैधानिक आधार: 74वाँ संशोधन और शहरी स्थानीय निकायों के 18 कार्य।
- रिपोर्ट: नीति आयोग और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की 'मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव सिटी गवर्नेंस'।
- फंडिंग का साधन: राज्यों के संरचनात्मक सुधारों से जुड़े अर्बन चैलेंज फंड और सिटी इकोनॉमिक रीजन्स।
निष्कर्ष: मिशन फंडिंग को शासन, नियोजन और वित्त सुधारों से जोड़ने पर शहरी विकास समावेशी और टिकाऊ बन सकता है।
मुख्य शब्द
- 74वाँ संशोधन
- शहरी स्थानीय निकायों को दर्जा और 18 कार्य देने वाला संवैधानिक संशोधन।
- एफएआर (FAR)
- फ्लोर एरिया रेशियो: भूखंड के आकार के सापेक्ष निर्माण क्षेत्र की सीमा।
- परिवहन-केंद्रित विकास (Transit-oriented development)
- सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास सघन, मिश्रित-उपयोग विकास।
- मेयर-इन-काउंसिल
- ऐसी प्रणाली जिसमें निर्वाचित महापौर सदस्यों की परिषद के साथ शासन करता है।
- अर्बन चैलेंज फंड
- शहरों को विकास केंद्र बनाने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का कोष।
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-I, GS-II, GS-V
स्रोत: राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026 संपन्न (पीआईबी, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय); दूसरे राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन में राजीव गौबा (पीआईबी, नीति आयोग)
अंतिम सत्यापन: 2026-10-26