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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत 2021 में शुरू हुई अटल वयो अभ्युदय योजना (अव्यय) वरिष्ठ नागरिकों के लिए देखभाल, स्वास्थ्य, सहायक उपकरण और सक्रिय वृद्धावस्था को एकीकृत करती है; 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में 755 परियोजनाओं के लिए 77.98 करोड़ रुपये जारी किए गए।
यह खबरों में क्यों है?
- पीआईबी ने 27 अक्टूबर 2026 को अव्यय पर बैकग्राउंडर जारी किया।
- 2026-27 में 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के लिए वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम के अंतर्गत 755 परियोजनाओं को सहायता अनुदान के रूप में 77.98 करोड़ रुपये जारी किए गए।
- 2011 की जनगणना में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 10.38 करोड़ है, और 60 वर्ष तथा उससे अधिक आयु की आबादी 2036 तक 23 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
मुख्य तथ्य एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| शुरुआत | 2021 |
| नोडल मंत्रालय | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता |
| विलय की गई योजना | वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPSrC) |
| वरिष्ठ नागरिक (जनगणना 2011) | 10.38 करोड़: 5.11 करोड़ पुरुष, 5.27 करोड़ महिलाएँ |
| 2036 का अनुमान | 23 करोड़ वरिष्ठ नागरिक |
| जारी अनुदान | 755 परियोजनाओं के लिए 77.98 करोड़ रुपये |
| समर्थित गृह | 764 वरिष्ठ नागरिक गृह |
| आईपीएसआरसी की अन्य इकाइयाँ | 13 सतत देखभाल केंद्र; 17 सचल चिकित्सा इकाइयाँ; 3 फिजियोथेरेपी क्लीनिक |
| राज्य स्तरीय नवाचार | आवंटित धन का 20 प्रतिशत तक |
अव्यय क्या करती है?
अव्यय वरिष्ठ नागरिकों के लिए संस्थागत देखभाल, स्वास्थ्य सेवाओं, सहायक उपकरणों, कौशल विकास, सक्रिय वृद्धावस्था और प्रौद्योगिकी को जोड़ने वाला एक एकीकृत ढाँचा देती है। यह भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सेवा और मनोरंजन सुविधाओं में सहायता करती है तथा सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों, स्थानीय निकायों और समुदायों की क्षमता बढ़ाती है।
यह अपने निवास स्थल पर गरिमापूर्ण वृद्धावस्था को बढ़ावा देती है, ताकि बुज़ुर्ग उपयुक्त गृह संशोधनों और सामुदायिक सहायता के साथ अपने घरों और समुदायों में रह सकें। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय नीति, वित्तपोषण और निगरानी के लिए नोडल मंत्रालय है।
भारत में दीर्घकालिक वृद्धावस्था अध्ययन (LASI) दिखाता है कि वृद्धजनों का बड़ा हिस्सा रोज़मर्रा के कामकाज में कठिनाई झेलता है, और शहरीकरण, प्रवासन और एकल परिवार पारंपरिक पारिवारिक सहायता को कमज़ोर कर रहे हैं। यही कारण है कि पारिवारिक देखभाल के साथ एक भरोसेमंद, संस्थागत और समुदाय-आधारित देखभाल प्रणाली बनाई जा रही है।
स्थैतिक पाठ्यक्रम से इसका संबंध क्या है?
- सामाजिक न्याय और कल्याण: वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा राज्य के नीति निदेशक तत्वों और माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम से जुड़ती है।
- अव्यय ने पहले की NAPSrC को एक समग्र योजना में मिला दिया।
- निगरानी ई-अनुदान पोर्टल, संपर्क-रहित बायोमेट्रिक उपस्थिति और लाइव सीसीटीवी फीड से की जाती है।
उत्तर प्रदेश का पहलू क्या है?
राज्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य कार्य योजनाएँ बनाते हैं, और ज़िला कलेक्टर/मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली ज़िला समितियाँ स्थानीय लाभार्थियों का चयन और वृद्धाश्रमों की निगरानी करती हैं; इसलिए उत्तर प्रदेश अव्यय को अपने समाज कल्याण तंत्र और ज़िला समितियों के माध्यम से लागू करता है। विज्ञप्ति में यूपी-विशिष्ट आँकड़ा नहीं है, इसलिए यहाँ कोई नहीं दिया गया।
कौन-से जोड़े आसानी से भ्रमित करते हैं?
- अव्यय और NAPSrC एक नहीं हैं: अव्यय ने उसे मिलाकर उसका विस्तार किया।
- आईपीएसआरसी और एसएपीएसआरसी अलग हैं: एक संस्थाओं को, दूसरा राज्य कार्य योजनाओं को धन देता है।
- 2011 की जनगणना का 10.38 करोड़ का आँकड़ा गणना है, अनुमान नहीं।
मुख्य शब्द
- अव्यय
- अटल वयो अभ्युदय योजना, वरिष्ठ नागरिकों के लिए समग्र योजना।
- आईपीएसआरसी
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम, मुख्य कार्यान्वयन घटक।
- एसएपीएसआरसी
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य कार्य योजना, जो राज्य स्तरीय योजनाओं को धन देती है।
- आरआरटीसी
- क्षेत्रीय संसाधन और प्रशिक्षण केंद्र।
- अपने निवास स्थल पर वृद्धावस्था
- बुज़ुर्गों का अपने घरों और समुदायों में सुरक्षित रहना।
- लासी (LASI)
- भारत में दीर्घकालिक वृद्धावस्था अध्ययन।
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-II, GS-V
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अव्यय कब शुरू हुई?
यह 2021 में शुरू हुई।
स्थानीय क्रियान्वयन की निगरानी कौन करता है?
ज़िला कलेक्टर/मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली ज़िला समितियाँ।
स्रोत: पीआईबी बैकग्राउंडर: अटल वयो अभ्युदय योजना
अंतिम सत्यापन: 2026-10-28