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इलाहाबाद उच्च न्यायालय, महाधिवक्ता और उत्तर प्रदेश में लेखा परीक्षा

यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-V · 7. उ0प्र0 में लोक सेवाएँ, लोक सेवा आयोग, लेखा परीक्षा, महान्यायवादी, उच्च न्यायालय एवं उसका अधिकार क्षेत्र।

संक्षिप्त उत्तर

इलाहाबाद उच्च न्यायालय, महाधिवक्ता (Advocate General) और राज्य की लेखा परीक्षा उत्तर प्रदेश में अलग-अलग अनुच्छेदों और अलग भूमिकाओं वाली संवैधानिक संस्थाएँ हैं। उच्च न्यायालय निर्णय देता है और पर्यवेक्षण करता है, महाधिवक्ता राज्य को सलाह देता है, और लेखा परीक्षा रिपोर्ट राज्यपाल के माध्यम से राज्य विधानमंडल तक पहुँचती है।

इस विषय पर यूपीपीएससी के पिछले प्रश्न

इस विषय से अभी कोई सत्यापित यूपीपीएससी प्रश्न नहीं जुड़ा है। सत्यापित प्रश्न जुड़ते ही यहाँ दिखेंगे।

पहले मूल शब्द

संचित निधि
राज्य की मुख्य निधि जिसमें राजस्व जाता है और जिससे व्यय होता है।
कोषागार
राज्य का वह कार्यालय जो सार्वजनिक धन प्राप्त करता और भुगतान करता है तथा लेखे महालेखाकार को भेजता है।
राज्यपाल
राज्य का प्रमुख, जिसे राज्य के लेखों पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट सौंपी जाती है।
विधानमंडल
राज्य की विधान सभा और विधान परिषद की संस्था।

मुख्य शब्द

रिट अधिकारिता
अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय की कुछ रिट जारी करने की शक्ति।
अभिलेख न्यायालय
ऐसा न्यायालय जिसके अभिलेख और निर्णय साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रहते हैं, जैसा अनुच्छेद 215 में है।
अधीक्षण
अनुच्छेद 227 के तहत अपने क्षेत्र के सभी न्यायालयों पर उच्च न्यायालय की शक्ति।
महाधिवक्ता (Advocate-General)
अनुच्छेद 165 के तहत राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी।
विनियोग लेखे
विधानमंडल द्वारा स्वीकृत प्रत्येक अनुदान के विरुद्ध व्यय दर्शाने वाले लेखे।
वित्त लेखे
राज्य सरकार की प्राप्तियों और संवितरणों के वार्षिक लेखे।

यूपीपीएससी जीएस-V के लिए यह विषय किस तरह प्रस्तुत है?

यह विषय उत्तर प्रदेश पर जीएस-V प्रश्नपत्र में आता है और इसमें लोक सेवाएँ, लोक सेवा आयोग, लेखा परीक्षा, महाधिवक्ता और उच्च न्यायालय व उसका अधिकार क्षेत्र शामिल हैं। प्रश्न आमतौर पर पहले संवैधानिक आधार और फिर उत्तर प्रदेश में उसके कामकाज को परखते हैं।

  • अनुच्छेदों की संख्या और प्रत्येक संस्था की एक पंक्ति की भूमिका याद करें।
  • हर संस्था को उत्तर प्रदेश से जोड़ें: प्रयागराज में उच्च न्यायालय, प्रयागराज में महालेखाकार कार्यालय और राज्य विधानमंडल।
  • उत्तर को तीन परतों में लिखें: संवैधानिक प्रावधान, उत्तर प्रदेश में उसका कामकाज, और एक सुधार या जवाबदेही का बिंदु।
  • सटीक शब्दों का प्रयोग करें: महाधिवक्ता सलाह देता है, उच्च न्यायालय निर्णय देता है, लेखा परीक्षक रिपोर्ट देता है।

इस पृष्ठ में उच्च न्यायालय, महाधिवक्ता और लेखा परीक्षा शामिल हैं। लोक सेवा आयोग पर अलग पृष्ठ है।

संवैधानिक ढाँचा क्या है?

संविधान के तीन अलग हिस्से इन संस्थाओं की रचना करते हैं। संघ और राज्यों की लेखा परीक्षा के नियम नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक वाले अध्याय में हैं, महाधिवक्ता राज्य कार्यपालिका के साथ आता है, और उच्च न्यायालय राज्यों में न्यायपालिका वाले अध्याय में है।

तीन संस्थाओं के पीछे के संवैधानिक प्रावधान
संस्था अनुच्छेद अनुच्छेद क्या प्रावधान करता है
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक 150 संघ और राज्यों के लेखाओं का प्रारूप
महाधिवक्ता 165 राज्य के लिए महाधिवक्ता
उच्च न्यायालय 214 राज्यों के लिए उच्च न्यायालय
उच्च न्यायालय 215 उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय होंगे
उच्च न्यायालय 226 कुछ रिट जारी करने की शक्ति
उच्च न्यायालय 227 सभी न्यायालयों पर अधीक्षण
उच्च न्यायालय 231 दो या अधिक राज्यों के लिए साझा उच्च न्यायालय

अनुच्छेद 233, 234 और 235 जिला न्यायाधीशों, न्यायिक सेवा में भर्ती और अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण से जुड़े हैं। ये दिखाते हैं कि उच्च न्यायालय केवल अपीलीय न्यायालय नहीं, बल्कि राज्य न्यायपालिका की निगरानी करने वाली संस्था भी है।

उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय और महाधिवक्ता कैसे काम करते हैं?

अनुच्छेद 214 प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय का प्रावधान करता है, और इलाहाबाद उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश का उच्च न्यायालय है। अनुच्छेद 215 हर उच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय बनाता है, इसलिए उसके अभिलेखों और निर्णयों का साक्ष्य मूल्य है और वह अपनी अवमानना पर दंड दे सकता है।

उसकी रोज़मर्रा की शक्ति दो अनुच्छेदों से तय होती है। अनुच्छेद 226 कुछ रिट जारी करने की शक्ति देता है, जो नागरिकों के लिए राज्य की कार्रवाई को चुनौती देने का मार्ग है। अनुच्छेद 227 अपने क्षेत्र के सभी न्यायालयों पर अधीक्षण की शक्ति देता है।

  1. नागरिक या अधिकारी उच्च न्यायालय जाता है
  2. अनुच्छेद 226 के तहत याचिका
  3. न्यायालय राज्य की कार्रवाई की जाँच करता है
  4. आदेश या निर्देश जारी होते हैं
  5. विधि के प्रश्न पर अपील
  • अनुच्छेद 231 दो या अधिक राज्यों के लिए साझा उच्च न्यायालय की अनुमति देता है, हालाँकि उत्तर प्रदेश का अपना उच्च न्यायालय है।
  • अनुच्छेद 235 उच्च न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण देता है, जो उसे राज्य के हर ज़िला न्यायालय से जोड़ता है।

इन न्यायालयों में महाधिवक्ता राज्य का अधिवक्ता होता है।

राज्य का महाधिवक्ता अनुच्छेद 165 के तहत एक संवैधानिक पद है। पदधारी राज्य सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है और उच्च न्यायालय व अन्य न्यायालयों में राज्य की ओर से उपस्थित होता है।

उत्तर प्रदेश में, जहाँ विधान सभा और विधान परिषद दोनों हैं, यह अधिकार दोनों सदनों पर लागू होता है।

महाधिवक्ता की तुलना राज्य के अन्य विधि पदों से
विशेषता महाधिवक्ता उच्च न्यायालय
संवैधानिक आधार अनुच्छेद 165 अनुच्छेद 214
मूल भूमिका राज्य के विधिक सलाहकार और अधिवक्ता न्यायनिर्णयन और न्यायालयों का पर्यवेक्षण
जवाबदेही राज्य सरकार के प्रति उत्तरदायी स्वतंत्र न्यायपालिका

अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका सीधा संवैधानिक उपचार है और सामान्य अपील से अलग है। याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय से जाँच करने को कहता है कि राज्य की कार्रवाई वैध है या नहीं, और राज्य का प्रतिनिधित्व प्रायः उसके विधि अधिकारी करते हैं।

साथ में वे संतुलन दिखाते हैं: राज्य सरकार अपने निर्णयों का बचाव करती है और उच्च न्यायालय उनकी समीक्षा कर सकता है।

उत्तर प्रदेश के लिए लेखा परीक्षा कैसे काम करती है?

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करते हैं और उन्हें उसी रीति और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जा सकता है जिन पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को। पद छोड़ने के बाद वे भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी और पद के पात्र नहीं होते।

अनुच्छेद 150 कहता है कि संघ और राज्यों के लेखे उस प्रारूप में रखे जाते हैं जो राष्ट्रपति नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की सलाह पर निर्धारित करते हैं।

  1. राज्य के विभाग संचित निधि से व्यय करते हैं
  2. कोषागार लेखे भेजते हैं
  3. महालेखाकार राज्य के लेखे तैयार करता है
  4. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट राज्यपाल को जाती है
  5. राज्यपाल उसे विधानमंडल के समक्ष रखते हैं

अनुच्छेद 243J और 243Z पंचायतों और नगरपालिकाओं के लेखों की लेखा परीक्षा का भी प्रावधान करते हैं, जिससे लेखा परीक्षा का तर्क स्थानीय शासन तक पहुँचता है।

  • लेखा परीक्षा जाँचती है कि धन उसी उद्देश्य पर खर्च हुआ जिसके लिए विधानमंडल ने मतदान किया था।
  • लेखा परीक्षा रिपोर्ट कार्यपालिका पर विधायी नियंत्रण का साधन है, क्योंकि विधानमंडल उसे राज्यपाल के माध्यम से ही देखता है।

उत्तर प्रदेश के लेखा परीक्षा और लेखा संबंधी आधिकारिक तथ्य क्या हैं?

उत्तर प्रदेश में महालेखाकार कार्यालयों पर आधिकारिक तथ्य
मद आधिकारिक तथ्य स्रोत वर्ष
पूर्व नाम महालेखाकार, संयुक्त प्रांत कार्यालय पृष्ठ
30 जनवरी 1950 से नाम महालेखाकार, उत्तर प्रदेश कार्यालय पृष्ठ
लेखा एवं हक़दारी कार्यालय की स्थापना 1 मार्च 1984, पुनर्गठन के बाद कार्यालय पृष्ठ
लेखा एवं हक़दारी कार्यालय का स्थान प्रयागराज कार्यालय पृष्ठ
तैयार किए जाने वाले लेखे विनियोग लेखे और वित्त लेखे कार्यालय पृष्ठ
पेंशन और निधि की भूमिका कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि लेखे कार्यालय पृष्ठ
निर्माण लेखे लोक निर्माण विभाग, लघु सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण कार्यालय पृष्ठ
वन लेखे वन प्रभागों के लेखों का संकलन कार्यालय पृष्ठ

इन पृष्ठों में लेखा परीक्षित राज्य व्यय की राशि, लेखा परीक्षा रिपोर्टों की संख्या या लंबित उच्च न्यायालय मामलों की संख्या नहीं दी गई है। ये खाने अनुमान लगाने के बजाय खाली छोड़े गए हैं।

उत्तर प्रदेश से जुड़ा पहलू क्या है?

उत्तर प्रदेश का अपना उच्च न्यायालय, अपना महाधिवक्ता और एक महालेखाकार कार्यालय है, जिसकी लेखा एवं हक़दारी शाखा प्रयागराज में है। कार्यालय राज्य कोषागारों से मिली सूचना के आधार पर राज्य सरकार के लेखे रखता है और विनियोग व वित्त लेखे तैयार करता है। वह लोक निर्माण विभाग, लघु सिंचाई और ग्रामीण अभियंत्रण सेवाओं के निर्माण लेखे भी रखता है और वन प्रभागों के लेखे संकलित करता है।

जीएस-V के उत्तर के लिए हर संस्था को राज्य के कामकाज से जोड़ें: राज्य की कार्रवाई के विरुद्ध रिट के लिए उच्च न्यायालय, राज्य के मुकदमों और विधानमंडल के अधिकारों के लिए महाधिवक्ता, और राज्यपाल के माध्यम से राज्य विधानमंडल के समक्ष रखे जाने वाले लेखों के लिए महालेखाकार।

उत्तरों में कौन-से उदाहरण उपयोग कर सकते हैं?

  • उत्तर प्रदेश में राज्य की कार्रवाई के विरुद्ध नागरिक के मार्ग के रूप में अनुच्छेद 226 की रिट।
  • राज्य के ज़िलों में अधीनस्थ न्यायालयों पर उच्च न्यायालय का अनुच्छेद 235 के तहत नियंत्रण।
  • 30 जनवरी 1950 से यह नाम पाने वाला महालेखाकार, उत्तर प्रदेश, जो विनियोग और वित्त लेखे तैयार करता है।

पुनरावृत्ति मानचित्र (माइंड मैप)

  • स्थानीय लेखा परीक्षा: अनुच्छेद 243J और 243Z
  • उत्तर प्रदेश से संबंध: प्रयागराज के कार्यालय, राज्य विधानमंडल, राज्य कोषागार

याद रखने के सूत्र

  • 226 रिट, 227 अधीक्षण: दो संख्याएँ रिट की शक्ति और अधीक्षण की शक्ति को अलग करती हैं।

स्रोत: भारत का संविधान (पॉकेट संस्करण), अनुच्छेदों की सूची; महालेखाकार (ले. एवं ह.)-I उत्तर प्रदेश, प्रयागराज: अधिदेश; महालेखाकार (ले. एवं ह.)-I उत्तर प्रदेश, प्रयागराज: कार्यालय

अंतिम सत्यापन: 2026-10-27