भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ: यूपीपीएससी GS-II नोट्स
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-II · 1. भारतीय संविधान– ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएं, संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान तथा आधारभूत संरचना। संविधान के आधारभूत प्रावधानों के विकास में उच्चतम न्यायालय की भूमिका।
संक्षिप्त उत्तर
भारतीय संविधान सर्वोच्च विधिक प्राधिकार है। यह भारत को संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाता है, जहाँ संसदीय शासन प्रणाली है। यह मूल अधिकारों की गारंटी देता है, तीन सूचियों के माध्यम से संघ और राज्यों में शक्तियों का विभाजन करता है और न्यायालयों की एकीकृत प्रणाली प्रदान करता है। यूपीपीएससी के लिए इन विशेषताओं, संविधान के भागों की संरचना और सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को समझें।
पहले मूल शब्द
- संविधान
- सर्वोच्च विधि जो सरकार के अंगों की स्थापना करती है।
- संसद
- राष्ट्रीय विधायिका।
- संशोधन
- संविधान में औपचारिक परिवर्तन।
मुख्य शब्द
- प्रस्तावना
- संविधान के लक्ष्यों का प्रारंभिक कथन।
- मूल अधिकार
- भाग III के अंतर्गत नागरिकों को प्रदत्त अधिकार।
- नीति निदेशक तत्व
- भाग IV के अंतर्गत राज्य की नीति के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत।
- सातवीं अनुसूची
- संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों वाली अनुसूची।
- अपच्छेद (repugnancy)
- संघ के कानून और राज्य के कानून के बीच टकराव।
- न्यायिक समीक्षा
- संविधान का उल्लंघन करने वाले कानूनों को रद्द करने की न्यायालयों की शक्ति।
- मूल ढाँचा
- वे मूल विशेषताएँ जिन्हें संशोधन नष्ट नहीं कर सकते।
यूपीपीएससी इस विषय को कैसे पूछता है
पाठ्यक्रम की पंक्ति में ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्वपूर्ण उपबंध और मूल ढाँचा तथा इसके मूल उपबंधों के विकास में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका शामिल है। प्रारंभिक परीक्षा में भागों, सूचियों और उपबंधों से जुड़े तथ्य पूछे जाते हैं। मुख्य परीक्षा में विशेषताओं की चर्चा, संघीय संतुलन और न्यायपालिका की भूमिका जैसे कोण पूछे जाते हैं।
सामान्य निर्देशात्मक शब्द हैं: चर्चा कीजिए, परीक्षण कीजिए और मूल्यांकन कीजिए। प्रत्येक विशेषता को किसी उपबंध और उसे संचालित करने वाली संस्था से जोड़ें। इसे यूपीपीएससी पाठ्यक्रम नोट्स तथा मूल ढाँचा सिद्धांत और सर्वोच्च न्यायालय के साथ पढ़ें।
संविधान की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
आसान पुनरावृत्ति के लिए विशेषताओं को चार शीर्षकों में बाँटा जा सकता है: राज्य का स्वरूप, नागरिक के अधिकार, शक्तियों का वितरण और स्वतंत्र न्यायपालिका। प्रत्येक शीर्षक इन नोट्स में आगे दिए गए भागों और उपबंधों से जुड़ता है, इसलिए अनुभागों को साथ पढ़ें।
संविधान भारत को संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य के रूप में स्थापित करता है, जहाँ संसदीय शासन प्रणाली है। यह सर्वोच्च विधिक प्राधिकार है, जो विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों अंगों को बाँधता है।
| विशेषता | अर्थ |
|---|---|
| मूल अधिकार | सभी नागरिकों को प्रदत्त; भाग III |
| न्यायिक समीक्षा | न्यायालय संविधान का उल्लंघन करने वाले कानूनों को रद्द कर सकते हैं |
| संघीय व्यवस्था | शक्तियाँ संघ और राज्यों में विभाजित |
| शक्तियों का पृथक्करण | सरकार के तीन अंग |
| स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव | भाग XV में निर्वाचन का प्रावधान |
| पंथनिरपेक्ष राज्य | अंतःकरण और धर्म की स्वतंत्रता को मान्यता |
प्रस्तावना सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता सुनिश्चित करने का संकल्प लेती है।
संविधान का संगठन कैसा है?
लेआउट सीखने का आसान तरीका है: राज्य से नागरिक और फिर सरकार की ओर बढ़ना। भाग I और II में क्षेत्र और नागरिकता है। भाग III से IVक में अधिकार, नीति निदेशक तत्व और कर्तव्य हैं। भाग V और VI में संघ और राज्य हैं। बाद के भाग स्थानीय निकायों, संघ और राज्यों के संबंध, निर्वाचन, आपात और संशोधन से संबंधित हैं।
पाठ भागों में व्यवस्थित है। तालिका में उन भागों को दिया गया है जिन्हें विद्यार्थियों को सही ढंग से याद रखना चाहिए।
| भाग | विषय |
|---|---|
| भाग I | संघ और उसका राज्यक्षेत्र |
| भाग II | नागरिकता |
| भाग III | मूल अधिकार |
| भाग IV | राज्य की नीति के निदेशक तत्व |
| भाग IVक | मूल कर्तव्य |
| भाग V | संघ |
| भाग VI | राज्य |
| भाग IX | पंचायतें |
| भाग IXक | नगरपालिकाएँ |
| भाग XVIII | आपात उपबंध |
| भाग XX | संविधान का संशोधन |
भाग XX में अनुच्छेद 368 संसद को संविधान में संशोधन की शक्ति देता है और प्रक्रिया निर्धारित करता है।
संघ और राज्यों के बीच शक्तियाँ कैसे विभाजित हैं?
भारत में संघवाद कठोर पृथक्करण से नहीं, बल्कि सातवीं अनुसूची से आकार लेता है। टकराव की स्थिति में संविधान संघ को अधिक सशक्त शक्तियाँ देता है, फिर भी राज्य सूची का क्षेत्र राज्य विधानमंडलों के लिए सुरक्षित रखता है। परीक्षा उत्तर में भारत को संघ की ओर झुकाव वाली संघीय व्यवस्था बताएँ और इसे अपच्छेद (repugnancy) के नियम से समझाएँ।
सातवीं अनुसूची में तीन सूचियाँ हैं: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची। संघ सूची पर संसद, राज्य सूची पर राज्य विधानमंडल तथा समवर्ती सूची पर दोनों कानून बनाते हैं। जो विषय न राज्य सूची में हैं और न समवर्ती सूची में, उन पर केवल संसद कानून बना सकती है।
- विषय सातवीं अनुसूची में सूचीबद्ध है
- संघ सूची: संसद
- राज्य सूची: राज्य विधानमंडल
- समवर्ती सूची: दोनों
- टकराव: संसद का कानून मान्य होता है, जब तक राज्य के कानून को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त न हो
समवर्ती विषय पर यदि राज्य का कानून संसद के कानून से टकराता है, तो अपच्छेद की सीमा तक संसद का कानून मान्य होता है। जिस राज्य कानून को राष्ट्रपति की अनुमति मिल चुकी है, वह उस राज्य में मान्य होता है।
सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका क्या है?
संविधान सर्वोच्च विधि है, इसलिए किसी को इसकी व्याख्या और रक्षा करनी होती है। यह कार्य न्यायालयों का है, जिनमें सर्वोच्च न्यायालय अंतिम प्राधिकारी है। चूँकि न्यायालय संविधान का उल्लंघन करने वाले कानूनों को अमान्य कर सकता है, इसलिए वह मूल उपबंधों के समय के साथ विकास को आकार देता है।
संविधान संघ और राज्य दोनों के कानूनों के प्रशासन के लिए न्यायालयों की एकल एकीकृत प्रणाली प्रदान करता है। शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय है, उसके बाद उच्च न्यायालय और ज़िला न्यायालय। इसके निर्णय भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी हैं।
- न्यायालय में भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और अधिकतम 37 अन्य न्यायाधीश होते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति नियुक्त करता है।
- न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्त होते हैं।
- किसी न्यायाधीश को केवल राष्ट्रपति हटा सकता है, संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अभिभाषण पारित होने के बाद, जिसे कुल सदस्यता के बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई का समर्थन मिले।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान के मूल ढाँचे का भाग है।
मूल ढाँचे का विचार संशोधन की शक्ति को सीमित करता है। इसे आकार देने वाले मामलों के लिए सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर मूल ढाँचा निर्णय पृष्ठ देखें।
उत्तर प्रदेश का कोण क्या है?
उत्तर प्रदेश संविधान के भाग VI के अंतर्गत एक राज्य है और इसका विधानमंडल उपर्युक्त ढाँचे के भीतर राज्य सूची पर कानून बनाता है। संविधान में पंचायतों पर भाग IX और नगरपालिकाओं पर भाग IXक भी है, जो अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकायों को भी शासित करते हैं। यहाँ प्रयुक्त स्रोत किसी विशिष्ट उत्तर प्रदेश अधिनियम का नाम नहीं देते, इसलिए राज्य के कानूनों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और विधानमंडल के पोर्टल देखें।
पुनरावृत्ति माइंड मैप
- स्वरूप: संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य; संसदीय शासन
- अधिकार: भाग III मूल अधिकार; न्यायालय उल्लंघन करने वाले कानून अमान्य कर सकते हैं
- संरचना: भाग I से XXII; भाग IV निदेशक तत्व; भाग IVक कर्तव्य
- संघवाद: सातवीं अनुसूची; संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ
- न्यायालय: एकीकृत प्रणाली; शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय
- संशोधन: भाग XX, अनुच्छेद 368
- मूल ढाँचा: न्यायपालिका की स्वतंत्रता इसका भाग है
याद रखने के सूत्र
- भाग III अधिकार, भाग IV निदेशक तत्व, भाग IVक कर्तव्य, भाग XX संशोधन: चार भाग जिन्हें सही ढंग से याद रखना है
- सं-रा-स: संघ, राज्य, समवर्ती: सातवीं अनुसूची की तीन सूचियाँ
FAQs
संसद को संविधान में संशोधन की शक्ति कौन-सा अनुच्छेद देता है?
भाग XX में अनुच्छेद 368।
सर्वोच्च न्यायालय में कितने न्यायाधीश हो सकते हैं?
मुख्य न्यायमूर्ति और अधिकतम 37 अन्य न्यायाधीश।
स्रोत: भारत का संविधान, मई 2022 तक का पाठ (विधायी विभाग); भारत का सर्वोच्च न्यायालय: संविधान
अंतिम सत्यापन: 2026-11-06