नीति आयोग और सतत विकास लक्ष्य: भारत की विकास योजना में भूमिका
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-III · 1. भारत में आर्थिक नियोजन, उद्देश्य एवं उपलब्धियॉ, नीति (एन0आई0टी0आई0) आयोग की भूमिका, सतत विकास के लक्ष्य (एस0डी0जी0)।
संक्षिप्त उत्तर
नीति आयोग भारत सरकार का प्रमुख नीतिगत 'थिंक टैंक' है, जिसका गठन 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के संकल्प से हुआ और जो भारत में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए नोडल संस्था है। यह एसडीजी इंडिया इंडेक्स और राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक के माध्यम से राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों पर नज़र रखता है।
इस विषय पर यूपीपीएससी के पिछले प्रश्न
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पहले मूल शब्द
- बेंचमार्किंग
- राज्यों के प्रदर्शन की एक-दूसरे से और लक्ष्यों से तुलना करना।
- थिंक टैंक
- ऐसी संस्था जो मुद्दों का अध्ययन करती है और सरकार को नीति पर सलाह देती है।
- नोडल संस्था
- किसी कार्य के समन्वय की ज़िम्मेदारी वाली प्रमुख संस्था।
मुख्य शब्द
- नीति आयोग
- भारत सरकार का शीर्ष नीतिगत थिंक टैंक, जिसका गठन 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के संकल्प से हुआ।
- सहकारी संघवाद
- राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों पर केंद्र और राज्यों का मिलकर काम करना।
- एसडीजी स्थानीयकरण
- एसडीजी लक्ष्यों को योजना और निगरानी के लिए राज्यों और ज़िलों तक ले जाना।
- 2030 एजेंडा
- सतत विकास लक्ष्यों की वैश्विक योजना, जिसका नेतृत्व भारत में नीति आयोग करता है।
- एसडीजी इंडिया इंडेक्स
- नीति आयोग की रिपोर्ट जो लक्ष्यों पर राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों की तुलना करती है।
नीति आयोग क्या है और क्या करता है?
नीति आयोग का गठन 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक संकल्प के माध्यम से किया गया। यह भारत सरकार का शीर्ष नीतिगत थिंक टैंक है और निर्देशात्मक तथा नीतिगत सुझाव देता है। यह केंद्र के लिए दीर्घकालिक रणनीतियाँ, नीतियाँ और कार्यक्रम भी तैयार करता है, तथा केंद्र, राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्रों को कार्यनीतिक एवं तकनीकी सलाह देता है।
यह सहकारी संघवाद के संस्थागत मंच के रूप में कार्य करता है: राज्य और केंद्र राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों में साथ मिलकर भाग लेते हैं। आधिकारिक पृष्ठ इस विचार को एक पंक्ति में कहता है कि सशक्त राज्य ही सशक्त राष्ट्र बनाते हैं।
| बिंदु | आधिकारिक स्थिति |
|---|---|
| गठनकर्ता | केंद्रीय मंत्रिमंडल का संकल्प |
| तिथि | 1 जनवरी 2015 |
| स्वरूप | भारत सरकार का शीर्ष नीतिगत थिंक टैंक |
| सलाह किसे | केंद्र, राज्य और संघ राज्य क्षेत्र |
| दृष्टिकोण | सहकारी संघवाद |
नीति आयोग के घोषित उद्देश्य क्या हैं?
- राज्यों की सक्रिय भागीदारी से राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और कार्यनीतियों का साझा विज़न बनाना।
- राज्यों को निरंतर संरचनात्मक सहयोग देकर सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना।
- ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजनाएँ बनाने के तंत्र विकसित करना और उन्हें चरणबद्ध रूप से सरकार के उच्च स्तरों पर जोड़ना।
- आयोग को निर्दिष्ट क्षेत्रों में आर्थिक कार्यनीति और नीति में राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को शामिल करना।
- समाज के उन वर्गों पर विशेष ध्यान देना जिन्हें आर्थिक प्रगति का पर्याप्त लाभ न मिल पाए।
- दीर्घकालिक नीति और कार्यक्रम ढाँचे तैयार करना, उनकी प्रगति की निगरानी करना और मध्यावधि सुधार करना।
- अंतर्क्षेत्रक और अंतर्विभागीय मुद्दों के समाधान के लिए मंच देना, ताकि विकास एजेंडा तेज़ी से आगे बढ़े।
- कार्यक्रमों के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता निर्माण पर ज़ोर देना।
सरल शब्दों में, उद्देश्य नीति आयोग को तीन काम देते हैं: राज्यों के साथ साझा विज़न बनाना, दीर्घकालिक कार्यक्रम तैयार करना और उनकी निगरानी करना, तथा विभागों के बीच की समस्याओं को सुलझाना। परीक्षा उत्तर में सभी उद्देश्य गिनाने के बजाय इन्हीं तीन शीर्षकों में उन्हें समूहित करें। इससे उत्तर छोटा रहता है और समझ दिखती है। आधिकारिक पृष्ठ उन वर्गों पर ध्यान देने पर भी बल देता है जिन्हें विकास का पर्याप्त लाभ नहीं मिलता; यह समावेशी विकास और उत्तर प्रदेश सहित किसी भी राज्य के कमज़ोर ज़िलों से जुड़े प्रश्नों के लिए उपयोगी बिंदु है।
- ग्राम स्तर की विश्वसनीय योजनाएँ
- सरकार के उच्च स्तरों पर संकलन
- राज्य अपनी प्राथमिकताएँ केंद्र के साथ साझा करते हैं
- राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का साझा विज़न
- निगरानी और मध्यावधि सुधार
यह क्यों महत्वपूर्ण है: जो योजना गाँवों से शुरू होकर ज़िलों और राज्यों तक पहुँचती है, वह केवल ऊपर से बनी योजना की तुलना में स्थानीय ज़रूरतों को बेहतर दर्शाती है। नीति आयोग केंद्र, राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को सलाह भी देता है, इसलिए यही प्रवाह एक फ़ीडबैक चक्र की तरह काम करता है। यह प्रवाह ग्राम स्तर पर योजनाएँ बनाकर उन्हें ऊपर जोड़ने के उद्देश्य का अनुसरण करता है। निगरानी और फ़ीडबैक का उपयोग नवोन्मेषी सुधारों के लिए किया जाता है, जिससे योजना चक्र निरंतर चलता रहता है।
एसडीजी में नीति आयोग की क्या भूमिका है?
नीति आयोग भारत में एसडीजी की प्राप्ति के लिए नोडल संस्था है। यह सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद की भावना से 2030 एजेंडा का नेतृत्व करता है, एसडीजी स्थानीयकरण को बढ़ावा देता है और राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना को प्रोत्साहित करता है।
| उपकरण | यह क्या करता है |
|---|---|
| एसडीजी इंडिया इंडेक्स | लक्ष्यों पर सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों की तुलना करता है |
| पूर्वोत्तर क्षेत्र ज़िला एसडीजी सूचकांक | पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के ज़िलों पर नज़र रखता है |
| राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक | राज्य, संघ राज्य क्षेत्र और ज़िला स्तर पर लक्ष्य 1.2 की प्रगति देखता है |
यह क्यों महत्वपूर्ण है: उपकरण राज्य और ज़िला स्तर पर काम करते हैं, इसलिए किसी राज्य का कमज़ोर क्षेत्र राष्ट्रीय औसत के सुधरने की प्रतीक्षा किए बिना पहचाना और सुधारा जा सकता है। आधिकारिक पृष्ठ एसडीजी इंडिया इंडेक्स के चौथे संस्करण का उल्लेख करता है। इसके अनुसार कुछ राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों ने कुछ लक्ष्यों में उल्लेखनीय प्रगति की है, जबकि अन्य में विकास की कमियाँ बनी हुई हैं, और सूचकांक इन कमियों को दिखाकर लक्षित कार्रवाई में मदद करता है।
उत्तर प्रदेश से संबंध
इस नोट के लिए उपयोग किए गए नीति आयोग के आधिकारिक पृष्ठों में उत्तर प्रदेश का कोई अंक, रैंक या आँकड़ा नहीं है, इसलिए यहाँ कोई आँकड़ा नहीं दिया गया है। UPPSC उत्तरों के लिए संबंध संरचनात्मक है: उत्तर प्रदेश एसडीजी इंडिया इंडेक्स और बहुआयामी गरीबी सूचकांक में शामिल राज्यों में से एक है, और सूचकांक ज़िला-स्तरीय गरीबी आँकड़े देता है जिनका उपयोग राज्य सरकारें योजना के लिए कर सकती हैं। दोहराते समय उत्तर प्रदेश के आँकड़े केवल एसडीजी इंडिया इंडेक्स की नवीनतम रिपोर्ट या राज्य के अपने पोर्टलों से लें।
UPPSC इस विषय को कैसे प्रस्तुत करता है
- प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य: संस्था का नाम, गठन का वर्ष (2015), गठन का प्रकार (केंद्रीय मंत्रिमंडल का संकल्प), भूमिका (शीर्ष नीतिगत थिंक टैंक, एसडीजी नोडल संस्था)।
- मुख्य परीक्षा का दृष्टिकोण: सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद का महत्व, राज्यों में लक्ष्यों की असमान प्राप्ति की चुनौतियाँ, और स्थानीयकरण तथा ज़िला-स्तरीय आँकड़ों के माध्यम से आगे की राह।
- उत्तर के सुझाव: 1 जनवरी 2015 के मंत्रिमंडल संकल्प से शुरू करें, 'सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद' वाक्यांश का प्रयोग करें, तीनों निगरानी उपकरणों के नाम लिखें और ज़िला-स्तरीय आँकड़ों के माध्यम से स्थानीयकरण पर समाप्त करें।
- GS-V और GS-VI से संबंध: उत्तर प्रदेश के बारे में लिखते समय राज्य और ज़िला स्तर के आँकड़ों का उपयोग करें, और स्पष्ट लिखें कि कोई आँकड़ा आधिकारिक स्रोत से उपलब्ध नहीं है।
स्थिति शब्दों को याद रखें: नीति आयोग कार्यकारी संकल्प से बनी संस्था है, और उसके सूचकांक निगरानी के उपकरण हैं, कानून नहीं। इस अंतर को ध्यान में रखने वाले उत्तर सटीकता में प्रायः बेहतर अंक पाते हैं।
त्वरित स्मरण के लिए समय-रेखा
- 1 जनवरी 2015: केंद्रीय मंत्रिमंडल के संकल्प से नीति आयोग का गठन
- निरंतर: एसडीजी इंडिया इंडेक्स राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों की तुलना करता है
- निरंतर: पूर्वोत्तर क्षेत्र ज़िला एसडीजी सूचकांक ज़िलों पर नज़र रखता है
- निरंतर: बहुआयामी गरीबी सूचकांक लक्ष्य 1.2 की प्रगति देखता है
- लक्ष्य वर्ष: 2030 एजेंडा
पुनरावृत्ति के लिए माइंड मैप
- शाखा 1, संस्था: नीति आयोग, 1 जनवरी 2015 का केंद्रीय मंत्रिमंडल संकल्प, शीर्ष नीतिगत थिंक टैंक।
- शाखा 2, पद्धति: सहकारी संघवाद, ग्राम-स्तरीय योजनाओं का ऊपर की ओर संकलन, निगरानी और मध्यावधि सुधार।
- शाखा 3, एसडीजी भूमिका: 2030 एजेंडा की नोडल संस्था, स्थानीयकरण और राज्यों में प्रतिस्पर्धा की भावना।
- शाखा 4, उपकरण: एसडीजी इंडिया इंडेक्स, पूर्वोत्तर क्षेत्र ज़िला एसडीजी सूचकांक, बहुआयामी गरीबी सूचकांक।
- शाखा 5, उत्तर प्रदेश: आधिकारिक रिपोर्टों से राज्य और ज़िला आँकड़े लें; उपयोग किए गए पृष्ठों में कोई आँकड़ा नहीं दिया गया है।
याद रखने के सूत्र
- 1-1-2015: नीति से नए साल की शुरुआत: नीति आयोग का गठन 1 जनवरी 2015 को हुआ।
- SDG-NE-MPI: तीन निगरानी उपकरण: एसडीजी इंडिया इंडेक्स, पूर्वोत्तर ज़िला सूचकांक, बहुआयामी गरीबी सूचकांक।
FAQs
नीति आयोग का गठन कब हुआ?
1 जनवरी 2015 को, केंद्रीय मंत्रिमंडल के संकल्प के माध्यम से।
भारत में एसडीजी की नोडल संस्था कौन-सी है?
नीति आयोग।
स्रोत: नीति आयोग: उद्देश्य और विशेषताएँ; नीति आयोग: एसडीजी का अवलोकन
अंतिम सत्यापन: 2026-11-04