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भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग: दायरा, योजनाएँ, आपूर्ति शृंखला और चुनौतियाँ

यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-III · 6. भारत में खाद्य प्रसंस्करण व संबंधित उद्योग-कार्यक्षेत्र एवं महत्व, स्थान निर्धारण, उर्ध्व व अधोप्रवाह आवश्यकताएं, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन।

संक्षिप्त उत्तर

खाद्य प्रसंस्करण भारतीय अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा है: यह सकल मूल्य वर्धन (GVA), रोज़गार और निर्यात में योगदान देता है, और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) इसे PMKSY, PLISFPI और PMFME के माध्यम से सहयोग देता है। इसकी मुख्य आवश्यकता खेत से खुदरा दुकान तक की मज़बूत शृंखला है।

इस विषय पर यूपीपीएससी के पिछले प्रश्न

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पहले मूल शब्द

मूल्य संवर्धन
किसी कृषि उत्पाद को प्रसंस्कृत करके उसका मूल्य बढ़ाना।
ऊर्ध्व-प्रवाह (अपस्ट्रीम)
प्रसंस्करण से पहले की गतिविधियाँ, जैसे खेती और संग्रहण।
अधो-प्रवाह (डाउनस्ट्रीम)
प्रसंस्करण के बाद की गतिविधियाँ, जैसे पैकेजिंग, खुदरा और निर्यात।

मुख्य शब्द

PMKSY
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना के लिए केंद्रीय क्षेत्र की छाता योजना।
PLISFPI
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना, 2021-22 से 2026-27।
PMFME
सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिकीकरण की योजना।
कोल्ड चेन
तापमान-नियंत्रित भंडारण और परिवहन, जो फ़सल कटाई के बाद की हानि घटाता है।
मेगा फ़ूड पार्क
साझा प्रसंस्करण, भंडारण और लॉजिस्टिक सुविधाओं वाला क्लस्टर।
कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर
कृषि आधार के निकट साथ-साथ लगाई गई प्रसंस्करण इकाइयों का समूह।

भारत के लिए खाद्य प्रसंस्करण क्यों महत्वपूर्ण है?

25 जुलाई 2024 की PIB विज्ञप्ति के अनुसार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग GDP, रोज़गार और निर्यात में अपनी हिस्सेदारी के कारण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग बन गए हैं। 2022-23 तक के आठ वर्षों में क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर लगभग 5.35% रही। इन्वेस्ट इंडिया बाद में 2023-24 तक के नौ वर्षों के लिए 6.55% बताता है।

संकेतक आधिकारिक आँकड़ा
2022-23 तक औसत वार्षिक वृद्धि लगभग 5.35% (PIB, 2024)
GVA, 2015-16 1.61 लाख करोड़ रुपये
GVA, 2022-23 1.92 लाख करोड़ रुपये
रोज़गार, 2014-15 17.73 लाख
रोज़गार, 2021-22 20.68 लाख
कृषि-खाद्य निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य की हिस्सेदारी, 2014-15 13.7%
कृषि-खाद्य निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य की हिस्सेदारी, 2023-24 23.4%

इन्वेस्ट इंडिया जोड़ता है कि क्षेत्र ने पंजीकृत विनिर्माण क्षेत्र के रोज़गार का 12.41% दिया (वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2022-23) और 2024-25 में कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात 49.4 अरब डॉलर रहा, जिसमें प्रसंस्कृत खाद्य 10.09 अरब डॉलर था, यानी कृषि-खाद्य निर्यात का लगभग 20%। कोई भी आँकड़ा उद्धृत करने से पहले उसका वर्ष जाँच लें, क्योंकि दोनों स्रोत अलग-अलग वर्ष और आधार का उपयोग करते हैं।

उद्योग का दायरा क्या है?

दायरा कच्ची उपज से तैयार उत्पादों तक फैला है। इन्वेस्ट इंडिया के अनुसार भारत दूध, मसालों और दालों का सबसे बड़ा उत्पादक है, तथा फल-सब्ज़ियों, खाद्यान्न, चाय, मछली और अंडों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। 2024-25 में बागवानी उत्पादन (द्वितीय अग्रिम अनुमान) लगभग 368 MMT है, जिसमें 114 MMT फल और 220 MMT सब्ज़ियाँ हैं। यह कृषि आधार मूल्य संवर्धन के लिए कच्चा माल देता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: प्रसंस्करण मौसमी, जल्दी खराब होने वाली फ़सल को ऐसे उत्पादों में बदलता है जो अधिक समय टिकते हैं, दूर तक जाते हैं और बेहतर दाम पाते हैं। इससे खेत की उपज कारखाने के रोज़गार और निर्यात आय से जुड़ती है, और इसी कारण यह क्षेत्र GS-III पाठ्यक्रम में कृषि और उद्योग के मिलन-बिंदु पर आता है। विद्यार्थी को ऊपर की तालिका के कम से कम एक आँकड़े से यह संबंध दिखाना आना चाहिए, जैसे कृषि-खाद्य निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य की हिस्सेदारी का 13.7% से 23.4% होना।

  • कृषि उपज का मूल्य संवर्धन और अधिक शेल्फ़ लाइफ़।
  • फ़सल कटाई के बाद कम बर्बादी और किसानों की बेहतर आय।
  • संगठित विनिर्माण में बड़ा रोज़गार।
  • प्रसंस्कृत निर्यात के माध्यम से वैश्विक बाज़ारों में प्रवेश।

स्रोत कोई निश्चित स्थान-निर्धारण नियम नहीं बताते, इसलिए नीचे के बिंदु आधिकारिक तथ्यों से निकाले गए अनुमान हैं: इकाइयों को कच्चे माल के निकट, समूहों में और बाज़ारों से कोल्ड चेन जोड़ के साथ लगाने पर लाभ होता है, इसी कारण योजना मेगा फ़ूड पार्क और कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर बनाती है। कृषि उपज की बर्बादी घटाना PMKSY का घोषित उद्देश्य है। उत्तर में तर्क एक वाक्य में रखें और किसी आधिकारिक स्थान-निर्धारण मानदंड का दावा न करें।

  • कृषि आधार के निकट: जल्दी खराब होने वाली उपज की परिवहन हानि घटती है।
  • क्लस्टर या पार्क में: अनेक इकाइयों के लिए साझा अवसंरचना।
  • कोल्ड चेन और निर्यात संपर्क के साथ: दूर और विदेशी खरीदारों से जुड़ाव।

कौन-सी योजनाएँ क्षेत्र को सहयोग देती हैं?

योजना मुख्य आधिकारिक तथ्य
PMKSY केंद्रीय क्षेत्र की छाता योजना; पूँजी अनुदान सहायता
PLISFPI 2021-22 से 2026-27; 10,900 करोड़ रुपये का परिव्यय
PMFME केंद्र प्रायोजित; 2020-21 से 2024-25; 10,000 करोड़ रुपये

विज्ञप्ति के अनुसार 30 जून 2024 तक MoFPI ने PMKSY के अंतर्गत 41 मेगा फ़ूड पार्क, 399 कोल्ड चेन परियोजनाएँ, 76 कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर, 588 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ, 61 पश्च और अग्र संपर्क परियोजनाएँ तथा 52 ऑपरेशन ग्रीन परियोजनाएँ स्वीकृत की थीं। PMFME के अंतर्गत कुल 92,549 सूक्ष्म उद्यम और PLISFPI के अंतर्गत 172 कंपनियाँ स्वीकृत हुईं। इन्वेस्ट इंडिया एक बाद की स्थिति बताता है (394 कोल्ड चेन परियोजनाएँ, 71 कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर), इसलिए गणना की तिथि हमेशा लिखें।

आपूर्ति शृंखला प्रबंधन कैसे काम करता है?

  1. खेत: उपज और संग्रहण
  2. प्राथमिक प्रसंस्करण और कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर
  3. कोल्ड चेन भंडारण और परिवहन
  4. मेगा फ़ूड पार्क और प्रसंस्करण इकाइयाँ
  5. पैकेजिंग, गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा जाँच
  6. खुदरा दुकानें और निर्यात बाज़ार

विज्ञप्ति के अनुसार PMKSY खेत से खुदरा दुकान तक कुशल आपूर्ति शृंखला प्रबंधन के साथ आधुनिक अवसंरचना बनाने में मदद करती है। ऊर्ध्व-प्रवाह (अपस्ट्रीम) की आवश्यकताएँ कच्चे माल की आपूर्ति और किसानों से पश्च संपर्क हैं। अधो-प्रवाह (डाउनस्ट्रीम) की आवश्यकताएँ कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण क्षमता, गुणवत्ता आश्वासन और विपणन हैं। मुख्य चुनौती शृंखला को अटूट रखना है: कोल्ड स्टोरेज या गुणवत्ता जाँच में कहीं भी कमी से नुकसान होता है और किसानों की आय घटती है, इसलिए योजनाएँ केवल कारखाने को नहीं, बल्कि छूटी हुई कड़ियों को भी वित्त देती हैं। इन्वेस्ट इंडिया स्वीकृत परियोजनाओं से 209 खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन सुविधाओं तथा 35 MMT से अधिक कोल्ड चेन क्षमता का उल्लेख करता है।

उत्तर प्रदेश से संबंध

उत्तर प्रदेश एक बड़ा कृषि राज्य है, और इन्वेस्ट इंडिया का पृष्ठ निवेशकों के लिए राज्यों में उसे सूचीबद्ध करता है तथा एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP) पहल से जोड़ता है। यहाँ उपयोग किए गए पृष्ठों में उत्तर प्रदेश की क्षमता, पार्क या निर्यात के आँकड़े नहीं हैं, इसलिए कोई आँकड़ा नहीं दिया गया है। ODOP का विचार खाद्य प्रसंस्करण के साथ अच्छी तरह बैठता है, क्योंकि कोई ज़िला अपने सर्वश्रेष्ठ स्थानीय कृषि उत्पाद के आसपास अपना प्रसंस्करण क्लस्टर बना सकता है। UPPSC उत्तरों के लिए विषय को ODOP उत्पादों, कोल्ड चेन की कमियों और किसान आय से जोड़ें, और दोहराते समय राज्य के आँकड़े केवल उत्तर प्रदेश सरकार के पोर्टलों से लें।

UPPSC इस विषय को कैसे प्रस्तुत करता है

  • प्रारंभिक परीक्षा: तीनों योजनाएँ (PMKSY, PLISFPI, PMFME), मंत्रालय (MoFPI) और स्वचालित तथा सरकारी मार्ग से 100% FDI की अनुमति जानें।
  • मुख्य परीक्षा: रोज़गार और कृषि आय के लिए महत्व, आपूर्ति शृंखला की चुनौतियाँ, और कोल्ड चेन, क्लस्टर तथा गुणवत्ता आश्वासन के माध्यम से आगे की राह।
  • उत्तर तीन भागों में लिखें: क्षेत्र क्यों महत्वपूर्ण है, योजनाएँ क्या करती हैं, और शृंखला को अब भी क्या सीमित करता है। आँकड़े का वर्ष और योजना की स्थिति हमेशा लिखें; 2024 की विज्ञप्ति के अनुसार PMFME की अवधि 2024-25 में समाप्त हुई।

पुनरावृत्ति के लिए माइंड मैप

  • शाखा 1, महत्व: GVA, रोज़गार और कृषि-खाद्य निर्यात में प्रसंस्कृत हिस्सेदारी।
  • शाखा 2, योजनाएँ: MoFPI के अंतर्गत PMKSY, PLISFPI और PMFME।
  • शाखा 3, आपूर्ति शृंखला: खेत, क्लस्टर, कोल्ड चेन, पार्क, खुदरा और निर्यात।
  • शाखा 4, स्थान: कच्चे माल के निकट, क्लस्टर में, कोल्ड चेन और निर्यात संपर्क के साथ।
  • शाखा 5, उत्तर प्रदेश: ODOP और ज़िला क्लस्टर; राज्य के आँकड़े उत्तर प्रदेश के पोर्टलों से।

याद रखने के सूत्र

  • P-P-P: PMKSY, PLISFPI, PMFME: 2024 की विज्ञप्ति में बताई गई MoFPI की तीन योजनाएँ।
  • खेत से खुदरा दुकान तक: PMKSY के पीछे आपूर्ति शृंखला का विचार।

FAQs

खाद्य प्रसंस्करण से कौन-सा मंत्रालय संबंधित है?

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI)।

खाद्य प्रसंस्करण में कितना FDI अनुमत है?

इन्वेस्ट इंडिया के अनुसार स्वचालित और सरकारी मार्ग से 100% FDI।

स्रोत: PIB: PMKSY के अंतर्गत MoFPI की स्वीकृतियाँ (25 जुलाई 2024); इन्वेस्ट इंडिया: खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र

अंतिम सत्यापन: 2026-11-04