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एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायु सेना के 29वें वायु सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह का स्थान लिया, जो 42 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।
समाचार में क्यों
- 31 अक्टूबर 2026: एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने औपचारिक रूप से 29वें वायु सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला (पीआईबी, रक्षा मंत्रालय)।
- उन्होंने एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह का स्थान लिया, जो 42 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।
- कार्यभार संभालने से पहले वे उप वायु सेना प्रमुख थे; ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने प्रमुखों की समिति के अधीन एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख के रूप में कार्य किया।
तथ्य तालिका
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कौन | एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित |
| पद | 29वें वायु सेना प्रमुख, भारतीय वायु सेना |
| कब | 31 अक्टूबर 2026 |
| पूर्ववर्ती | एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह |
| मंत्रालय | रक्षा |
| कमीशन | 6 दिसंबर 1986, लड़ाकू विमान शाखा |
| उड़ान अनुभव | 3,300 घंटे से अधिक |
| प्रशिक्षण | एनडीए; डीएसएससी; राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली |
करियर की मुख्य बातें
- मिराज-2000, मिग के कई संस्करण, जगुआर और कई परिवहन विमान उड़ाए; वे लड़ाकू पायलट, उड़ान प्रशिक्षक और प्रायोगिक परीक्षण पायलट हैं।
- जगुआर और मिग-27 विमानों के उन्नयन की परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया और हल्के लड़ाकू विमान एलसीए एमके-1 तेजस की प्रारंभिक और अंतिम परिचालन मंजूरी प्रक्रियाओं को पूरा कराने में भूमिका निभाई।
- मिराज-2000 स्क्वाड्रन, पश्चिमी क्षेत्र की एक अग्रिम वायुसेना अड्डा सहायता इकाई और प्रमुख लड़ाकू प्रशिक्षण केंद्र वायु सेना स्टेशन बीदर की कमान संभाली।
- दक्षिणी वायु कमान में वायु रक्षा कमांडर, दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान में वरिष्ठ वायु स्टाफ अधिकारी, उप वायु सेना प्रमुख और मध्य वायु कमान के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ के पद संभाले।
- सम्मान: वायु सेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और परम विशिष्ट सेवा पदक।
मुख्य शब्द
- वायु सेना प्रमुख: भारतीय वायु सेना का प्रमुख।
- एकीकृत रक्षा स्टाफ: प्रमुखों की समिति के अधीन कार्य करने वाला संयुक्त स्टाफ।
- आईओसी और एफओसी: विमान की प्रारंभिक और अंतिम परिचालन मंजूरी।
- एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ: किसी वायु कमान का प्रमुख।
स्थैतिक संबंध
- भारतीय वायु सेना रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत तीन सेवाओं में से एक है।
- इसकी कमानों में दक्षिणी, दक्षिण-पश्चिमी और मध्य वायु कमान शामिल हैं, जिनका उल्लेख इस करियर विवरण में है।
- एलसीए तेजस हल्का लड़ाकू विमान कार्यक्रम है, और इसकी मंजूरी प्रक्रिया के दो चरण हैं, पहले आईओसी, फिर एफओसी।
- जीएस-III संबंध: रक्षा तैयारी, स्वदेशी विमान और संयुक्त सैन्य योजना।
उत्तर प्रदेश का पक्ष
विज्ञप्ति में उत्तर प्रदेश के किसी स्टेशन या इकाई का नाम नहीं है, इसलिए इससे कोई राज्य-विशिष्ट दावा नहीं किया गया है। संबंध जीएस-III और जीएस-VI के माध्यम से है: वायु सेना का नेटवर्क, जिसमें कई राज्यों के अड्डे शामिल हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया में सहायक है। अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश के वायु सेना स्टेशनों की किसी भी सूची को उपयोग से पहले वायु सेना या रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक स्रोतों से पुष्ट करें।
संभावित भ्रांतियाँ
- वायु सेना प्रमुख रक्षा स्टाफ प्रमुख नहीं है; वायु सेना प्रमुख केवल एक सेवा का प्रमुख है।
- उप वायु सेना प्रमुख प्रमुख का उप होता है; कार्यभार संभालने से पहले वे इसी पद पर थे।
- आईओसी एफओसी नहीं है; विमान की मंजूरी में पहला दूसरे से पहले आता है।
- किसी कमान का एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ सेवा प्रमुख नहीं होता।
याद रखने की युक्ति: दीक्षित: 29वें प्रमुख, 31 अक्टूबर, 1986 में कमीशन, 3,300 घंटे की उड़ान।
मुख्य शब्द
- वायु सेना प्रमुख
- भारतीय वायु सेना के प्रमुख।
- ऑपरेशन सिंदूर
- वह अभियान जिसके दौरान उन्होंने एकीकृत रक्षा स्टाफ में कार्य किया।
- एलसीए तेजस एमके-1
- भारतीय हल्का लड़ाकू विमान, जो आईओसी और एफओसी से गुजरा।
- आईओसी
- प्रारंभिक परिचालन मंजूरी।
- एफओसी
- अंतिम परिचालन मंजूरी।
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-III
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उन्होंने किसका स्थान लिया?
एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह, जो 42 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।
उन्हें कमीशन कब मिला?
6 दिसंबर 1986 को, भारतीय वायु सेना की लड़ाकू विमान शाखा में।
स्रोत: पीआईबी, रक्षा मंत्रालय: एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने वायु सेना प्रमुख का कार्यभार संभाला
अंतिम सत्यापन: 2026-11-01