भारत में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA): प्रक्रिया, समितियाँ और निगरानी
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-III · 13. पर्यावरणीय सुरक्षा एवं पारिस्थितिकी तंत्र, वन्य जीवन संरक्षण, जैव विविधता, पर्यावरणीय प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरणीय संघात आंकलन।
संक्षिप्त उत्तर
पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) एक प्रबंधन उपकरण है जो सतत विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करने में मदद करता है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय विशेषज्ञ मूल्यांकन, पर्यावरणीय मंजूरी और निगरानी की प्रक्रिया बताता है, जिसमें उत्तर प्रदेश के लिए लखनऊ में एक क्षेत्रीय कार्यालय है।
इस विषय पर यूपीपीएससी के पिछले प्रश्न
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पहले मूल शब्द
- सतत विकास
- ऐसा विकास जो प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस तरह करे कि भविष्य के लिए वे समाप्त न हों।
- पर्यावरणीय मंजूरी
- पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों की शर्त पर परियोजना को दी गई अनुमति।
- परियोजना प्रस्तावक
- वह प्राधिकरण या कंपनी जो मंजूरी के लिए आवेदन करती है।
मुख्य शब्द
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन
- सतत विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करने वाला प्रबंधन उपकरण।
- मूल्यांकन समिति
- विशेषज्ञ समिति जो परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करती है और स्वीकृति या अस्वीकृति की सिफ़ारिश करती है।
- स्थल मंजूरी
- स्थल-विशिष्ट परियोजनाओं के लिए दो-चरणीय मंजूरी का पहला चरण, जो पर्यावरणीय मंजूरी से पहले होता है।
- पर्यावरणीय मंजूरी
- मूल्यांकन के बाद, सुरक्षा उपायों और निगरानी की शर्त पर दी गई स्वीकृति।
- वहन क्षमता अध्ययन
- किसी क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की सीमाओं का अध्ययन, जो विकास के चुनावों का मार्गदर्शन करता है।
पर्यावरणीय प्रभाव आकलन क्या है?
पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) एक महत्वपूर्ण प्रबंधन उपकरण है जो सतत विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करता है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के EIA पृष्ठ के अनुसार भारत में यह प्रक्रिया 1978-79 में नदी घाटी परियोजनाओं के प्रभाव आकलन से शुरू हुई।
बाद में इसका दायरा औद्योगिक परियोजनाओं, तापीय विद्युत परियोजनाओं, खनन योजनाओं और अन्य विकास क्षेत्रों तक बढ़ाया गया। मंत्रालय के पृष्ठ के अनुसार अब EIA पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत 50 करोड़ रुपये और उससे अधिक के निवेश वाली 29 श्रेणियों की विकास गतिविधियों के लिए अनिवार्य है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: EIA पर्यावरणीय लागत को योजना चरण में ही सामने ले आता है, यानी धन खर्च होने और भूमि साफ़ किए जाने से पहले। इससे निर्णयकर्ता किसी खदान, कारखाने या बाँध के लाभ की तुलना वायु, जल, भूमि और लोगों पर उसके प्रभाव से कर पाते हैं, और बाद में परियोजना की जाँच के लिए एक अभिलेख भी मिलता है। GS-III के उत्तर में EIA को दंडात्मक नहीं, बल्कि निवारक उपकरण के रूप में प्रस्तुत करें और इसे सतत विकास से जोड़ें।
| बिंदु | मंत्रालय के पृष्ठ में क्या कहा गया है |
|---|---|
| भारत में पहला कदम | 1978-79, नदी घाटी परियोजनाएँ |
| कानूनी आधार | पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 |
| किनके लिए अनिवार्य | विकास गतिविधियों की 29 श्रेणियाँ |
| निवेश सीमा | 50 करोड़ रुपये और उससे अधिक |
कौन-सी समितियाँ परियोजनाओं का मूल्यांकन करती हैं?
बहुविषयक सुझाव प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों हेतु विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियाँ गठित की गई हैं:
प्रत्येक समिति में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ साथ आते हैं, इसलिए किसी परियोजना का मूल्यांकन तकनीकी, पारिस्थितिक और सामाजिक आधार पर होता है, केवल एक विभाग के आधार पर नहीं। यह बहुविषयक दृष्टिकोण मूल्यांकन चरण की मुख्य ताकत है।
- खनन परियोजनाएँ
- औद्योगिक परियोजनाएँ
- तापीय विद्युत परियोजनाएँ
- नदी घाटी, बहुउद्देशीय, सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाएँ
- अवसंरचना विकास और विविध परियोजनाएँ
- परमाणु ऊर्जा परियोजनाएँ
मूल्यांकन प्रक्रिया कैसे काम करती है?
- परियोजना प्राधिकरण EIA अधिसूचना में सूचीबद्ध दस्तावेज़ों के साथ आवेदन करता है
- मंत्रालय के तकनीकी कर्मचारी आवेदन की जाँच करते हैं
- मूल्यांकन समिति परियोजना के प्रभाव का आकलन करती है, आवश्यकता होने पर स्थल-दौरे के साथ
- समिति स्वीकृति या अस्वीकृति की सिफ़ारिश करती है
- मंत्रालय निर्णय की प्रक्रिया पूरी करता है
- सुरक्षा उपायों सहित पर्यावरणीय मंजूरी, फिर निगरानी
खनन, नदी घाटी तथा बंदरगाह जैसी स्थल-विशिष्ट परियोजनाओं के लिए मंत्रालय का पृष्ठ दो-चरणीय मंजूरी बताता है: परियोजना प्राधिकरण को पर्यावरणीय मंजूरी के लिए आवेदन करने से पहले स्थल मंजूरी लेनी होती है। इसका उद्देश्य पारिस्थितिक रूप से नाज़ुक और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से बचना है। जहाँ प्रस्तावक पूरी जानकारी देता है, वहाँ 90 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाता है। दो चरण इसलिए महत्वपूर्ण हैं कि गलत स्थल को बाद में केवल सुरक्षा उपायों से ठीक नहीं किया जा सकता; शुरुआत में ही नाज़ुक क्षेत्रों से बचना नुकसान की मरम्मत करने से सस्ता और सुरक्षित है।
मंजूरी पाने वाली परियोजनाओं की निगरानी कैसे होती है?
मंजूरी मिलना मामले का अंत नहीं है। मंत्रालय का पृष्ठ निगरानी को उसी प्रणाली का हिस्सा मानता है, जिसका घोषित उद्देश्य यह जाँचना है कि सुझाए गए सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं और आवश्यकता होने पर दिशा सुधारी जाए। पर्यावरणीय मंजूरी निर्धारित सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन की शर्त पर दी जाती है। मंत्रालय के पृष्ठ के अनुसार स्वीकृत परियोजनाओं की निगरानी मंत्रालय के छह क्षेत्रीय कार्यालय करते हैं, जो शिलांग, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, बैंगलोर, लखनऊ और भोपाल में हैं।
- परियोजना प्राधिकरण शर्तों और सुरक्षा उपायों की प्रगति की रिपोर्ट हर छह महीने में देता है।
- अधिकारी और विशेषज्ञ दल प्रदर्शन आँकड़े जुटाने और विश्लेषण करने के लिए क्षेत्र-दौरे करते हैं।
- गंभीर विचलन या खराब प्रतिक्रिया की स्थिति में मामला संबंधित राज्य सरकार के साथ उठाया जाता है।
- परियोजना के दायरे में बदलाव की पहचान की जाती है, ताकि देखा जा सके कि पहले के निर्णय की समीक्षा आवश्यक है या नहीं।
उत्तर प्रदेश से संबंध
मंत्रालय के पृष्ठ में लखनऊ को उन छह क्षेत्रीय कार्यालयों में गिना गया है जो स्वीकृत परियोजनाओं की निगरानी करते हैं। यह EIA तंत्र को सीधे उत्तर प्रदेश से जोड़ता है: उत्तर प्रदेश की जिस परियोजना को मंजूरी मिलती है, उसकी निगरानी क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से होती है और गंभीर विचलन राज्य सरकार के साथ उठाए जाते हैं। पृष्ठ में उत्तर प्रदेश की परियोजनाओं के आँकड़े नहीं हैं, इसलिए यहाँ कोई आँकड़ा नहीं दिया गया है। परीक्षा के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है: उत्तर प्रदेश में निगरानी पर प्रश्न का उत्तर लखनऊ कार्यालय, छह-माही रिपोर्ट और राज्य सरकार की भूमिका का नाम लेकर दिया जा सकता है, किसी आँकड़े की आवश्यकता नहीं। दोहराने के लिए यह शृंखला याद रखें: प्रस्तावक, मूल्यांकन समिति, मंत्रालय, मंजूरी, छह-माही रिपोर्ट, क्षेत्रीय कार्यालय, राज्य सरकार।
UPPSC EIA को कैसे प्रस्तुत करता है, और संबंधित अध्ययन
- प्रारंभिक परीक्षा: अधिनियम (पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986), सीमा (50 करोड़ रुपये) और श्रेणियों की संख्या (29) याद रखें, जैसा मंत्रालय के पृष्ठ में कहा गया है, तथा EIA शुरू होने का वर्ष (1978-79)।
- मुख्य परीक्षा: सतत विकास के लिए महत्व, मंजूरी के बाद निगरानी की चुनौतियाँ, और छह-माही रिपोर्ट तथा क्षेत्र-दौरों के माध्यम से आगे की राह।
- उत्तर की संरचना: EIA को परिभाषित करें, कानूनी आधार बताएँ, समिति-आधारित मूल्यांकन का वर्णन करें, फिर निगरानी और आगे की राह पर समाप्त करें।
- स्थिति सदैव स्पष्ट लिखें: परियोजना मंजूर, अस्वीकृत या मूल्यांकनाधीन है; मसौदा नियम को अंतिम नियम न कहें।
मंत्रालय का पृष्ठ वहन क्षमता अध्ययनों का भी वर्णन करता है, जिनमें उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों की सूची, मौजूदा पर्यावरणीय स्थिति, 'बिज़नेस एज़ यूज़ुअल' परिदृश्य, उपचारात्मक कार्रवाई की माँग करने वाले हॉट स्पॉट की पहचान, और पसंदीदा परिदृश्य सहित वैकल्पिक विकास परिदृश्य शामिल हैं। ऐसे अध्ययनों के लिए चुने गए क्षेत्रों में दून घाटी, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दामोदर नदी बेसिन और ताप्ती मुहाना हैं।
जैसा पृष्ठ में उल्लेख है, तटीय राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को 1991 की तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) अधिसूचना के अंतर्गत तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजनाएँ तैयार करनी होती हैं। ये अध्ययन दिखाते हैं कि EIA केवल एकल परियोजनाओं के बारे में नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सीमाओं के बारे में भी है, जो क्षेत्रीय नियोजन के प्रश्नों के लिए उपयोगी बिंदु है। इस पृष्ठ की तिथियों और संख्याओं को मंत्रालय के कथन के अनुसार मानें; वर्तमान नियम उद्धृत करने से पहले नवीनतम अधिसूचना देखें।
पुनरावृत्ति के लिए माइंड मैप
- EIA
- उद्गम: 1978-79, नदी घाटी परियोजनाएँ
- कानून: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- 29 श्रेणियाँ, 50 करोड़ रुपये और उससे अधिक
- मूल्यांकन समितियाँ (6 क्षेत्र)
- निगरानी: 6 क्षेत्रीय कार्यालय, जिनमें लखनऊ
याद रखने के सूत्र
- 1978-79: पहले नदी घाटियाँ: EIA की शुरुआत 1978-79 में नदी घाटी परियोजनाओं से हुई।
- छह कार्यालय, छह-माही रिपोर्ट: छह क्षेत्रीय कार्यालय परियोजनाओं की निगरानी करते हैं; रिपोर्ट हर छह महीने में आती है।
FAQs
EIA किस अधिनियम के अंतर्गत अनिवार्य है?
मंत्रालय का पृष्ठ कहता है कि EIA पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत गतिविधियों की 29 श्रेणियों के लिए अनिवार्य है।
मंत्रालय का उत्तर प्रदेश स्थित क्षेत्रीय कार्यालय कौन-सा है?
लखनऊ, जो स्वीकृत परियोजनाओं की निगरानी करने वाले छह क्षेत्रीय कार्यालयों में से एक है।
स्रोत: MoEFCC: पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA)
अंतिम सत्यापन: 2026-11-04