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12वां ब्रिक्स संसदीय मंच 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सर्वसम्मत संयुक्त घोषणा-पत्र के साथ संपन्न हुआ, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांत दोहराए गए, सीमापार आतंकवाद की निंदा की गई और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का समर्थन किया गया। आधिकारिक विज्ञप्तियों में पश्चिम एशिया का उल्लेख नहीं है, इसलिए उस क्षेत्र पर बहस की जाँच घोषणा-पत्र के पाठ से करनी होगी।
संदर्भ क्या है?
12वां ब्रिक्स संसदीय मंच 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सर्वसम्मति से संयुक्त घोषणा-पत्र अंगीकृत करने के बाद संपन्न हुआ। भारतीय संसद में आयोजित और लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता वाले इस मंच का विषय 'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना' था। अध्यक्ष ने मंच की अध्यक्षता चीन को सौंपी, जो 2027 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण करेगा।
घोषणा-पत्र संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, संप्रभु समानता, परस्पर सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराता है। यह भारत की अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सहमत नई दिल्ली घोषणा को भी दोहराता है। यहाँ उद्धृत प्रेस विज्ञप्तियों में पश्चिम एशिया का उल्लेख नहीं है, इसलिए यह पृष्ठ उस क्षेत्र पर घोषणा-पत्र की स्थिति का वर्णन नहीं करता।
मुख्य तर्क क्या हैं?
- संवाद से शांति: अध्यक्ष ने कहा कि स्थायी समाधान संघर्ष या युद्ध में नहीं, संवाद, शांति और सहयोग में हैं।
- आतंकवाद: घोषणा-पत्र सीमापार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों की निंदा करता है तथा जीरो टॉलरेंस और दोहरे मापदंडों को समाप्त करने की माँग करता है।
- वैश्विक शासन सुधार: सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और ग्लोबल साउथ के अधिक प्रतिनिधित्व का समर्थन किया, जैसा नई दिल्ली घोषणा के पैराग्राफ 13 में दर्ज है।
- संसद और प्रौद्योगिकी: संसदें पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित हों तथा नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के मार्गदर्शन में ज़िम्मेदार प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करें।
- समावेशी व्यवस्था: अध्यक्ष ने कहा कि ब्रिक्स को किसी के विरुद्ध खड़ा नहीं होना चाहिए, बल्कि सबको साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
दूसरा पक्ष क्या है?
- घोषणा-पत्र एक राजनीतिक वक्तव्य है और सदस्य संसदों या सरकारों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है।
- सदस्यों के विचार, परिस्थितियाँ और चुनौतियाँ अलग-अलग हैं, जैसा अध्यक्ष ने स्वयं कहा; सर्वसम्मति की भाषा मतभेदों को छिपा सकती है।
- आतंकवाद की सामान्य निंदा से यह खुला रहता है कि सदस्य संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादियों पर व्यवहार में कैसे कार्रवाई करेंगे।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए ब्रिक्स से आगे सहमति चाहिए, इसलिए मंच का समर्थन संकेत है, निर्णय नहीं।
- संसदों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के लिए सुरक्षा उपाय चाहिए, और विज्ञप्ति नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही को शर्तें बताती है।
दावों पर आधिकारिक रिकॉर्ड क्या कहता है?
| बहस में दावा | आधिकारिक रिकॉर्ड क्या कहता है | स्रोत |
|---|---|---|
| मंच ने पश्चिम एशिया की शत्रुता उठाई | विज्ञप्तियों में पश्चिम एशिया का उल्लेख नहीं है | पीआईबी, 26-27 अक्टूबर 2026 |
| घोषणा-पत्र सुरक्षा परिषद सुधार का समर्थन करता है | सदस्यों ने सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज़ का समर्थन किया | पीआईबी, 27 अक्टूबर 2026 |
| घोषणा-पत्र आतंकवाद को निशाना बनाता है | सीमापार आतंकवाद और आतंकवाद के वित्तपोषण की निंदा | पीआईबी, 27 अक्टूबर 2026 |
| ब्रिक्स एक प्रमुख समूह है | राज्य सभा के उपसभापति ने कहा कि यह विश्व की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है | पीआईबी, 26 अक्टूबर 2026 |
| अध्यक्षता का हस्तांतरण | चीन 2027 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा | पीआईबी, 27 अक्टूबर 2026 |
जो भी मंच की पश्चिम एशिया पर स्थिति के बारे में लिखे, उसे दावा करने से पहले घोषणा-पत्र का पाठ देखना चाहिए, क्योंकि यहाँ प्रयुक्त आधिकारिक विज्ञप्तियाँ कोई स्थिति नहीं बतातीं।
उत्तर प्रदेश से संबंध क्या है?
विज्ञप्तियों में उत्तर प्रदेश की किसी संस्था या आँकड़े का उल्लेख नहीं है। राज्य से संबंध अप्रत्यक्ष है: पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित विधायिकाओं के मंच के विषय उत्तर प्रदेश विधान सभा और विधान परिषद पर लागू होते हैं, जो संघीय संसदीय प्रणाली का हिस्सा हैं। GS-II और GS-V के लिए इसे इस उदाहरण के रूप में प्रयोग करें कि विधायिकाएँ ज़िम्मेदार प्रौद्योगिकी और जन-भागीदारी कैसे अपना सकती हैं। राज्य का कोई निर्णय मंच के नाम न करें।
आगे की राह क्या है?
- चीन की अध्यक्षता में 2027 की ब्रिक्स अध्यक्षता पर नज़र रखें और देखें कि संयुक्त घोषणा-पत्र को कैसे आगे बढ़ाया जाता है।
- अध्यक्ष के आमंत्रण के अनुसार प्रौद्योगिकी पर संसदीय सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ साझा करें।
- व्यापक बहुपक्षीय प्रक्रिया के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार और ग्लोबल साउथ प्रतिनिधित्व पर सहमति बनाएँ।
- आतंकवाद की निंदा को संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादियों और संगठनों के विरुद्ध समन्वित कार्रवाई में बदलें।
निबंध और नीतिशास्त्र के उत्तरों में इसका उपयोग कैसे करें?
- उद्धरण योग्य पंक्ति: शांति मतभेद का अभाव नहीं, बल्कि मतभेद को संवाद से सुलझाने की आदत है।
- उद्धरण योग्य पंक्ति: संसद केवल कानून बनाने की जगह नहीं, जनता का विश्वास सँजोने की जगह भी है।
- उद्धरण योग्य पंक्ति: प्रौद्योगिकी लोगों की सबसे अच्छी सेवा तब करती है जब नैतिकता उसकी सीमाएँ तय करे।
- कहाँ उपयोग करें: बहुपक्षवाद, लोकतंत्र और प्रौद्योगिकी पर निबंध; GS-II अंतरराष्ट्रीय संबंध; GS-IV प्रौद्योगिकी की नैतिकता।
माइंड मैप: मंच (विषय, अध्यक्षता, परिणाम) – घोषणा-पत्र (संयुक्त राष्ट्र चार्टर, आतंकवाद, सुरक्षा परिषद सुधार) – संसदें (पारदर्शिता, एआई) – ग्लोबल साउथ (प्रतिनिधित्व) – अगले कदम (2027 में चीन की अध्यक्षता)।
निष्कर्ष क्या है?
12वां ब्रिक्स संसदीय मंच शांति, आतंकवाद, वैश्विक शासन सुधार और संसदों के लिए ज़िम्मेदार प्रौद्योगिकी पर सर्वसम्मत घोषणा-पत्र के साथ संपन्न हुआ। यह साझा इरादे का वक्तव्य है, बाध्यकारी प्रतिबद्धता नहीं। इसका महत्व 2027 की अध्यक्षता और राष्ट्रीय विधायिकाओं में अनुवर्ती कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
मुख्य शब्द
- ब्रिक्स संसदीय मंच
- ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के पीठासीन अधिकारियों और सांसदों की बैठक।
- संयुक्त घोषणा-पत्र
- मंच पर अंगीकृत सर्वसम्मत वक्तव्य।
- ग्लोबल साउथ
- विकासशील देश जो वैश्विक शासन में बड़ी आवाज़ चाहते हैं।
- सुरक्षा परिषद सुधार
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता और कार्यप्रणाली बदलने के प्रस्ताव।
- नई दिल्ली घोषणा
- भारत की अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का परिणाम।
- जीरो टॉलरेंस
- आतंकवाद के साथ कोई समझौता न करने की नीति।
यूपीपीएससी पाठ्यक्रम: GS-II
स्रोत: पीआईबी: 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच संयुक्त घोषणा-पत्र के साथ संपन्न; पीआईबी: समापन सत्र में लोक सभा अध्यक्ष का संबोधन; पीआईबी: राज्य सभा उपसभापति का स्वागत भाषण
अंतिम सत्यापन: 2026-10-28